रुद्रप़ुर। कांग्रेस की किसान महायात्रा और खाट सभा पर कई दलों के सियासतदानों की नजर टिकी है। इसकी सफलता और असफलता पर प्रोफेशनल रणनीतिकार प्रशांत किशोर की टीआरपी निर्भर करेगी। कांग्रेस की नैया पार लगाने को पतवार थामें प्रशांत किशोर उसी फार्मूले को आजमा रहे हैं जिसे लोकसभा चुनाव में मोदी के लिए प्रयोग किए थे। तब पीके भाजपा के प्रचार का कमान संभाल रहे थे।
मोदी की चाय पर चरचा को हिट कराने वाले पीके ने कांग्रेस को उसी तर्ज पर खाट सभा दिया है। नाम बदलकर चरचा को नया रुप देने वाले कांग्रेस के नए रणनीतिकार इस बार किसानों की दुखती रग को थामकर कांग्रेस को कामयाबी दिलाने की कोशिश में जुटे हैं। कर्ज के बोझ तले दबे किसानों को कर्ज माफी की गारंटी देकर कांग्रेस की तरफ मोड़ने का प्रयास किया है।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्वांचल के किसान बाहुल्य इलाके से कर वह पूरे प्रदेश में संदेश देने का प्रयास कर रहे हैं। किसान महायात्रा की तैयारी बता रही है कि कांग्रेस को दूर का मंजिल दिखाई दे रही है। जानकारों के अनुसार पीके ने यह रणनीति सिर्फ यूपी के 2017 के विधानसभा चुनाव को देखकर नहीं बनाई है, बल्कि वह इसे 2019 के लोकसभा चुनाव के लिए मजबूत प्लेटफॉर्म तैयार करना चाहते हैं।
छह तारीख से शुरू राहुल की किसान यात्रा की सफलता प्रदेश में कांग्रेस की अहमियत तय करेंगी। बनारस में सोनिया के रोड शो में भीड़ जुटाने में सफल टीम पीके का उत्साह चरम पर है। वहीं भाजपा, सपा और बसपा के चुनावी रणनीतिकार कांग्रेस की किसान यात्रा के महाअभियान पर पैनी नजर रख रहे हैं।
कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेेश प्रताप सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी की नकल नहीं है बल्कि राहुल गांधी की किसानों के प्रति संवेदना का जीता जागता प्रमाण है। राहुल जमीन पर काम करने वाले नेता है उन्हें एक्टिंग में कभी विश्वास नहीं है।