फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पांच दिन बाद भी संदिग्धों की नहीं आ रही जांच रिपोर्ट

विज्ञापन
विज्ञापन
कोरोना की जांच रिपोर्ट देरी से आने पर पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार
विज्ञापन

किट के अलावा जांच के लिए मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा सैंपल
देवरिया। कोरोना जांच की रिपोर्ट कई दिनों बाद लोगों को मिल रही है। तब तक संक्रमित कई लोगों के संपर्क में आ जा रहे हैं। इन्हें दवा तक बताने वाला कोई नहीं है। कई लोग पांच दिन से अपने घर में आइसोलेट हैं। इन लोगों की ऐसी शिकायत है। वहीं जिम्मेदार मेडिकल कॉलेज गोरखपुर का मामला बताकर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं।
दिक्कत महसूस होने पर लोग जांच कराने के लिए सैंपल कलेक्शन सेंटरों पर पहुंच रहे हैं। किट से जांच के बाद तत्काल रिपोर्ट मिल जा रही है, लेकिन कंफर्मेशन के लिए सैंपल गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा जा रहा है। पांच से छह दिन में लोगों की जांच रिपोर्ट आ रही है। तब तक लोग अपने घरों में क्वारंटीन हैं। ऐसे लोगों को कोई दवा तक बताने वाला नहीं है। दिक्कत होने पर कोविड-19 अस्पताल में जाने की सलाह डॉक्टर दे रहे हैं।
विज्ञापन

केस एक
30 जुलाई को सलेमपुर के एक व्यक्ति का सैंपल लिया गया। इसकी हालत गंभीर बनी हुई है, लेकिन आज तक सैंपल गोरखपुर मेडिकल कॉलेज भेजा ही नहीं गया। इनके परिवार का सदस्य जब सीएमओ कार्यालय पहुंचा और सैंपल रिपोर्ट आने की बात पूछी तो चेक करने के बाद कर्मचारी ने बताया कि 30 जुलाई को जिला अस्पताल से सैंपल रिपोर्ट जो आई है, उसमें नाम नहीं है। इसको लेकर दो घंटे तक वह परेशान रहा। बाद में बीमार व्यक्ति को लेकर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज चला गया, लेकिन उसके सवालों का जवाब किसी ने नहीं दिया। ऐसी घटना कई लोगों के साथ हो चुकी है।
केस दो
बरहज विधायक सुरेश तिवारी के साथ रहने वाले लोगों को तकलीफ हुई तो उन्होंने 29 जुलाई को जांच कराई। अधिकारियों से भी बात हुई, लेकिन रिपोर्ट शनिवार की दोपहर बाद तक नहीं आई। जबकि विधायक के उद्योगपति पुत्र संजय तिवारी ने प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को फोन कर उनका समुचित इलाज कराने की बात कही। बावजूद उन्हें कोई इलाज मुहैया नहीं हो सका है। घर पर आठ से अधिक लोग चार दिनों से होम क्वारंटीन हैं।
इस बाबत सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय ने बताया कि सैंपल भेजना हम लोगों का काम है। गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में जांच होती है। लैब पर अधिक दबाव होने के कारण थोड़ी देर हो रही है। आइसोलेट लोगों को परेशानी के अनुसार दवा बताया जा रहा है। एक व्यक्ति का सैंपल भेजने में गड़बड़ी हुई है। इसका पता लगाया जा रहा है।
होम आइसोलेशन में करीब 370 संक्रमित
देवरिया। बिना लक्षण वाले मरीजों को होम आइसोलेशन में रखा जा रहा है। ऐसे मरीजों का शौचालय, कमरा और उपयोग का सभी सामान अलग है। किसी तरह की दिक्कत महसूस होने पर कोविड-19 अस्पताल बुलाया जा रहा है। जिले में करीब 370 संक्रमितों को होम आइसोलेशन में रखा गया है। ब्लॉक स्तरीय पीएचसी, सीएचसी पर रैपिड रिसपांस टीम बनाई गई है, जो मरीजों से मोबाइल पर संपर्क कर इन्हें दवा बता रही है। इनके अनुसार मरीज दवा का खुराक ले रहे हैं, आरोप है कि जब मरीज फोन कर रहे हैं तो रैपिड रिसपांस टीम का फोन ही रिसीव नहीं हो रहा है।
विज्ञापन

ऐसी शिकायत अफसरों तक पहुंच रही है। उधर सीएमओ डॉ. आलोक पांडेय ने बताया कि कोरोना के कारण डॉक्टरों की व्यस्तता अधिक है, इसलिए कभी-कभी मोबाइल रिसीव नहीं हो रहा है। जिन सक्रमितों का फोन आता है। उनके सीएचसी की रैपिड रिस्पांस टीम को फोन कर बात करने के लिए कहा जाता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें