देवरिया। निजी फाइनेंस कंपनियों के उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं का आंदोलन तेज हो गया है। सैकड़ों की संख्या में कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को जुटी महिलाओं ने धरना प्रदर्शन किया।
महिलाओं के तेवर को देखते हुए बड़ी संख्या में महिला पुलिस बल तैनात किया गया था। महिला एकता शक्ति की अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने एसपी से मुलाकात कर ज्ञापन देकर कार्रवाई की मांग की। जिले में हजारों की तादात में महिलाओं ने निजी फाइनेंस कंपनियों से छोटे-छोटे व्यवसाय के लिए ऋण लिया है।
कंपनियां 15 हजार से 30 हजार रुपयेे तक समूह की महिलाओं को कर्ज देती हैं और उनसे 24 फीसदी तक घटते दर से सप्ताह और महीने में ब्याज वसूलती हैं। महिलाओं का कहना है कि नोटबंदी के कारण धंधा या चौपट हो गया है।
गरीबी के कारण ब्याज चुकता नहीं कर पा रही हैं। ऐसे में फाइनेंस कंपनियों के लोग पैसे के एवज में मौके से बकरी, साइकिल, गैस सिलिंडर आदि सामान उठा ले जा रहे हैं। उत्पीड़न रोकने और कर्जमाफी की मांग को लेकर सलेमपुर, गौरीबाजार, बैतालपुर, भिंगारी बाजार, बरहज, भाटपाररानी, लार आदि इलाके की सैकड़ों की महिलाएं सोमवार को कलेक्ट्रेट परिसर में पहुंची। महिलाओं ने चौथे दिन भी धरना प्रदर्शन जारी रखा।
अध्यक्ष मन्नू तिवारी के नेतृत्व में महिलाएं नारेबाजी करते हुए एसपी कार्यालय पर पहुंची। महिलाओं ने एसपी को पांच सूत्रीय मांगपत्र दिया और कार्रवाई की मांग की। इस बाबत एक फाइनेंस कंपनी के परियोजना समन्वयक आदित्य त्रिपाठी ने अमर उजाला को बताया कि उनकी कंपनी आरबीआई के दिशा निर्देशों के मुताबिक काम कर रही है।
आईडीबीआई की निगरानी में काम कर रही है। महिलाओं को छोटे छोटे व्यवसाय के लिए 20 से 30 हजार रुपये तक कर्ज दिया गया है। 24 फीसदी ब्याज घटते दर पर वसूलता जाता है। जब ऋण दिया जाएगा तो समय से वसूली का प्रयास किया जाएगा। फील्ड अफसर महिलाओं से दुर्व्यवहार नहीं कर रहे हैं। कुछ लोग महिलाओं को गुमराह कर रहे हैं।