फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

‘छोटा सिपाही’ ने भरी बाल मन में प्रेरणा

विज्ञापन
अमर उजाला के तरफ से आयोजित बाल फिल्म महोत्सव के दौरान स्वामी विवेकानंद स्कूल से फिल्म देखकर बाहर - फोटो : DEORIA
विज्ञापन
‘छोटा सिपाही’ ने भरी बाल मन में प्रेरणा
विज्ञापन

बाल फिल्में देखकर बच्चों ने खूब लगाए ठहाके
अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति भारत की ओर से स्कूलों में हुआ बाल फिल्म का प्रदर्शन
बच्चे बोले, फिल्म से बहुत कुछ सीखने को मिला
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। अमर उजाला फाउंडेशन और बाल चित्र समिति भारत की अनोखी मुहिम के तहत सोमवार को तरकुलवा क्षेत्र में बाल फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें स्वामी विवेकानंद जूनियर हाई स्कूल गढ़राम में ‘छोटा सिपाही’ और कांसेप्ट एकेडमी जमुनी में ‘पकड़ा गया’ बाल फिल्म दिखाई गई। फिल्म देखने के बाद बच्चों ने अपने मन की बात भी कही। बच्चों को दोनों फिल्में काफी पसंर्द आइं। बाल फिल्मों के वैन का इंतजार कर रहे बच्चों की नजर के सामने ज्यों ही वैन पहुंची, उनके चेहरे खिल उठे।
विज्ञापन

स्वामी विवेकानंद जूनियर हाई स्कूल गढ़रामपुर में करीब 240 बच्चों को छोटा सिपाही बाल फ़िल्म दिखाई गई। इसमें विनय कुमार सिंह, गुलाबचंद कुशवाहा, सचिदानंद त्रिपाठी, कमलाकांत सिंह, हरिनारायण सिंह पटेल, तेज प्रताप सिंह ने बताया कि फिल्म के प्रेरणादायी कंटेंट के साथ कॉमेडी दृश्य ने बच्चों को खूब हंसाया। जुनेजा खातून ने जोजे के पढ़ने के संघर्ष को सराहा। रवीना खातून जोजे की देशभक्ति से प्रभावित हुई। विशाल जोजे की दूसरों की मदद करने की प्रवृत्ति। शिवानी पटेल, रितिका जायसवाल, प्रज्ञा जायसवाल, सोनम कुशवाहा, गोल्डी गोंड, अंकिता यादव ने फिल्म की सराहना की। इसके बाद कांसेप्ट एकेडमी जमुनी तरकुलवा में ‘पकड़ा गया’ बाल फ़िल्म दिखाई गई। इसमें जहांगीर आलम, विशाल शर्मा, दिलीप यादव, गोविंद कुशवाहा, तबरेज आलम, मुकेश राव सहित करीब दो सौ बच्चों ने फ़िल्म देखी। फ़िल्म में बच्चों के बंदर के प्रति प्रेम को दिखाया गया है। गौरव, विनय, ईशान, विक्की, खुश्बू, गरिमा, अभिषेक, आराध्या आदि बच्चों को फिल्म में बंदर की आदत पसंद आई। बच्चे बोल पड़े कि किसी का गुमशुदा समान अपने पास नहीं रखना चाहिए। उसे वापस कर देना चाहिए। इतना ही नहीं, पशु-पक्षियों को कैद कर घर में नहीं रखना चाहिए। फिल्म शुरू होते ही हाल में मौजूद बच्चे एकाग्र होकर प्रोजेक्टर पर नजर गड़ाए रहे। बच्चों ने कहा कि ऐसी नैतिक शिक्षाप्रद फिल्में स्कूल में दिखाई जानी चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें