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Deoria News: बच्चों को सता रहा डायरिया, पीआईसीयू फुल

Sun, 13 Apr 2025 12:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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पीआईसीयू में भर्ती बच्चे
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- बुखार, उल्टी-दस्त से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ी
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- रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने से वायरल फीवर, डायरिया की गिरफ्त में आ रहे बच्चे
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मौसम बदलने का असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। वायरल इंफेक्शन से ग्रसित हो रहे हैं। वायरल फीवर, उल्टी-दस्त की चपेट में आ रहे हैं। इसके अलावा बदन व सिर में दर्द, सर्दी-खांसी, सांस की भी परेशानी हो रही है। छोटे बच्चे निमोनिया से भी पीड़ित हाे रहे हैं। तेज बुखार होने पर झटका भी आ रहा है। मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। रोजाना डेढ़ सौ से अधिक मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इससे पीआईसीयू फुल हो गया है।
डॉक्टर दवा देने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। गंभीर मरीजों को भर्ती कर इलाज किया जा रहा है, जबकि अन्य मरीजों को दवा दी जा रही है। पीआईसीयू का बेड खाली होने के साथ ही भर जा रहे हैं। एक बेड पर दो-दो मरीजों का इलाज हो रहा है, जिससे मरीजों व तीमारदारों को परेशानी हो रही है। बुखार के मरीजों को ठीक होने में तीन से पांच दिन तथा डायरिया मरीजों को पांच से सात दिन लग जा रहा है। वहीं निजी अस्पतालों में भी मरीजों की भीड़ हो रही है।
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शनिवार को डॉ. रवि गुप्ता ने करीब दो सौ मरीजों का इलाज किया। इसमें सबसे अधिक उल्टी-दस्त के साथ बुखार के करीब सौ मरीज थे, जबकि वायरल फीवर से पीड़ित बीस, सिर दर्द के पंद्रह, निमोनिया के पंद्रह से बीस मरीज के अलावा सर्दी, खांसी, जुकाम तथा अन्य बीमारी से पीड़ित मरीज थे। गंभीर करीब चार मरीजों को भर्ती किया गया। डॉक्टर ने मरीज की जांच के बाद दवा देने के साथ सावधानी बरतने की सलाह दी। उधर पीआईसी व चिल्ड्रेन वार्ड में बेड खाली होते ही भर जा रहे हैं। सुबह करीब 51 बच्चे थे। इसमें 15 बेड के पीआईसूयी में 21 मरीज थे, जबकि बीस बेड के चिल्ड्रेन वार्ड में 30 मरीज भर्ती थे। इसमें बुखार के 24, उल्टी-दस्त के आठ, सांस के 12, पेट दर्द के चार बच्चे भर्ती थे। उल्टी-दस्त में दिया जाने वाला जिंक सीरप समाप्त हो गया है, टैबलेट से काम चलाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर कुछ मरीजों को बाहर से खरीदा पड़ रहा है, जिससे उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रवि गुप्ता ने बताया कि मौसम बदलने पर वायरस ग्रोथ करते हैं, जिससे आरएसवी, इंफ्लूएंजा, पैरा इंफ्लूएंजा, रोटा वायरस का संक्रमण बढ़ जाता है। इम्युनिटी कम होने से बच्चे वायरल फीवर व डायरिया की चपेट में आ जाते हैं, जिससे बुखार, उल्टी-दस्त, सांस, पेट दर्द, सर्दी-खांसी, जुकाम, निमोनिया से पीड़ित हो जाते हैं। रोटा वायरस के संक्रमण से उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या बढ़ी है। दूषित खाद्य पदार्थ व पानी के सेवन से बच्चे बीमार हो रहे हैं। आरएसबी वायरस के संक्रमण से छोटे बच्चे निमोनिया से भी पीड़ित हो रहे हैं। वायरल फीवर की चपेट में आने से छह माह से पांच साल के बच्चों बच्चों को तेज बुखार आ रहा है। दवा देने के बाद नहीं उतर रहा है और झटका आ रहा है। ऐसे में सावधानी बरतने की जरूरत है। नार्मल पानी से पट्टी करना चाहिए व शरीर पोछना चाहिए। मासूम बच्चों को तेज बुखार न उतरने और पेशाब कम होने और उल्टी बंद न होने पर तत्काल विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर उनकी सलाह पर दवा देना चाहिए। हाइड्रेशन को मेंटेन करना बहुत जरूरी है।

ये बरतें सावधानी
- साफ-सफाई पर ध्यान दें
- पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पीएं, शरीर में कमी न होने पाए
- जंक व फास्ट फूड के सेवन से परहेज करें
- बाजार में सड़क किनारे खुले में बिकने वाली चीजों व जूस का सेवन न करें
- घर के बने ताजा, सुपाच्य भोजन का सेवन करें
- मौसमी फल व हरी पत्तेदार साग-सब्जी का सेवन करें
- फल को घर लाकर अच्छी तरह धोकर व साफ कर खाएं
- छोटे बच्चों को छह माह तक मां का दूध पिलाएं
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