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Deoria News: केमिकल मिला रंग-गुलाल बदरंग न कर दे चेहरा

Wed, 26 Feb 2025 01:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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दुकान मेें बिक्री के लिए रखे गए गुलाल। संवाद 
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देवरिया। होली पर रंगों और अबीर गुलाल का प्रयोग करते वक्त सावधानी बरतना जरूरी है। हर्बल के नाम पर बाजार में कई दुकानों पर केमिकल मिला अबीर और गुलाब बिक रहा है। इसकी चमक देखते ही कोई भी इनकी ओर आकर्षित हो सकता है। पर सावधान रहें इनका प्रयोग सेहत के लिए घातक हो सकता है, खासकर आंखों और त्वचा के लिए। त्योहार की खुशी के बीच सेहत को लेकर अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत है। खाद्य पदार्थों को जहरीला बनाने के बाद मिलावटखोरों ने रंग-गुलाल को भी नहीं छोड़ा है।
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होली को देखते हुए मिलावटखोर सक्रिय हो गए हैं। मिलावटी रंग और गुलाल हाथरस, दिल्ली, कानपुर से गोरखपुर आता है। गोरखपुर से देवरिया जिले में आता है। ज्यादातर थाेक दुकानदार रंग, अबीर, गुलाल गोरखपुर से मंगाते हैं। गोरखपुर के बड़े व्यापारी जिले के थोक व्यापारियों को मिलावटी माल बेचते हैं। फिर यहां बैठै थोक व्यापारी ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी सप्लाई करते हैं। कम दाम में मिलने वाले गुलाल से यह हर्बल कह कर मोटी कमाई कर रहे हैं।
जिले में होली के समय रंग और गुलाल का करीब ढाई करोड़ का कारोबार होता है। शहर में बिकने के लिए आया केमिकल युक्त खुशबूदार गुलाल होली के रंग में भंग न डाल दे। होली खेलते समय अगर केमिकल युक्त अबीर गुलाल हमारी आंख व कान में चला जाए तो इससे हमारे शरीर को नुकसान हो सकता है।
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जानकारी के अनुसार गुलाल हर्बल बताकर बेचा जा रहा है। मिट्टी और चावल के आटे में केमिकल और रंग डालकर इसे तैयार किया गया है। चिंता की बात यह है कि ये मिलावटी चमकदार गुलाल ज्यादातर दुकानों तक पहुंच भी गए हैं। थोक में इसका रेट 12 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम है। दूसरे प्रकार के अबीर में चावल का आटा मिलाया जाता है। इसकी कीमत 40 से 45 रुपये है। चेहरे पर लगाने पर ये थोड़ा मुलायम रहता है। लेकिन इसमें उस चावल का इस्तेमाल किया जाता है जिसे खराब होने पर दुकान से हटा दिया जाता है।
इस चावल को पीसकर आटा बनाया जाता है। इसके बाद मिक्सर में रंग, केमिकल और आटे को खूब मिलाते हैं। तीसरा आरारोट का बना गुलाल है। इसकी कीमत 60 से 65 रुपये है। इसमें भी केमिकल है लेकिन नुकसामन क हैं। इसके अवा लाएक हर्बल गुलाल भी है। लेकिन ज्यादातर दुकानदार आरारोट के गुलाल को ही हर्बल बताकर बेच रहे हैं। ग्राहक पकड़ न पाए इसके लिए गुलाल में खुशबू के लिए फ्रेगरेंस मिलाया जाता है।
सामान्य तौर पर अरारोट में रंग मिलाकर तैयार किया जाता है। इस समय थोक बाजार में इसकी कीमत 45 रुपये किलो है, लेकिन इसमें भी पत्थर की डस्ट मिलाई जा रही है। ऐसे में इसकी कीमत बहुत कम हो जाती है। पत्थर डस्ट का गुलाल थोक बाजार में 10 रुपये किलो बिक रहा है। इसके इस्तेमाल से त्वचा छिल सकती है। दूसरी ओर थोक बाजार में शुद्ध रंग एक हजार रुपये प्रति किलो से भी महंगा है, लेकिन कई दुकानों पर यह 150 रुपये किलो में बिक रहा है। खतरनाक केमिकल मिलाकर उन्हें ज्यादा चटख बनाया जाता है। खासतौर पर नीला, बैंगनी और हरा रंग। सीएमएस डॉ. एचके मिश्रा ने बताया मिलावटी गुलाल लगाने से चेहरे को कई नुकसान हो सकते हैं। इसमें मौजूद रसायनिक पदार्थ त्वचा की जलन का कारण बन सकते हैं। कई बार इससे त्वचा पर फोफले पड़ जाते हैं। ज्यादा देर तक चेहरे पर रहने पर इससे खुजली और एलर्जी भी हो सकती है। इससे फेफड़ों की समस्या और त्वचा में संक्रमण भी हो सकता है।
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