सिद्धार्थनगर। नगर पालिका के अवेद्यनाथ सभागार में चल रहे अमृतमयी श्रीराम कथा महोत्सव के पांचवें दिन मंगलवार को प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह प्रसंग का वर्णन किया गया। जैसे ही कथा में विवाह का प्रसंग आया, पूरा सभागार जय श्रीराम और सीताराम के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति के रस में सराबोर होकर झूमने लगे।
अयोध्या के कथा वाचक संत गौरव कृष्ण शास्त्री ने जनकपुर में आयोजित स्वयंवर और विवाह की पावन कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीराम और माता सीता का विवाह केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं बल्कि धर्म, मर्यादा और आदर्शों की स्थापना का प्रतीक है। संत शास्त्री ने कहा कि श्रीराम का जीवन हमें कर्तव्य, सत्य और मर्यादा का पालन करने की प्रेरणा देता है।
वहीं, माता सीता त्याग, समर्पण और आदर्श नारीत्व की प्रतिमूर्ति हैं। उनके पावन मिलन से संपूर्ण सृष्टि आनंदित हो उठी थी, जिसकी झलक आज भी इस कथा के माध्यम से देखने को मिलती है। विवाह प्रसंग के दौरान भजन-कीर्तन और मंगल गीतों ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया।