झाड़-झंखाड के बीच बिरान पड़ा तरकुलवा का गो आश्रय स्थल।
तरकुलवा। कंडाैली गो आश्रय स्थल में अव्यवस्था उजागर होने के बाद भी जिम्मेदार चेत नहीं रहे हैं। जिले के कई गो आश्रय स्थलों में भी अव्यवस्था का बोलबाला है। तरकुलवा कस्बे में गो आश्रय स्थल में बृहस्पतिवार को एक भी पशु नजर नहीं आए। चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ है। हर तरफ झाड़-झंखाड़ उगा है, जबकि सड़कों पर छुट्टा पशुओं का झुंड घूम रहा है।
इसको लेकर व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का आरोप है कि जब गो आश्रय स्थल मौजूद है तो छुट्टा पशुओं को वहां क्यों नहीं रखा जा रहा है। कस्बे में थाने के बगल में छुट्टा पशुओं को पड़ककर रखने के लिए वर्ष 2019-20 में जिला पंचायत की ओर से करोड़ो रुपये खर्च कर गो आश्रय स्थल का निर्माण कराया गया। वर्तमान में यह शोपीस बनकर रह गया है।
चहारदीवारी के भीतर पशुओं के रहने और भूसा रखने के लिए दो टिन शेड बनाए गए हैं। चौकीदार केएक कक्ष, शौचालय और बाथरूम का निर्माण कराया गया। मुख्यमंत्री के निर्देश पर औपचारिक उद्घाटन के बाद एक शिलापट्ट भी लगा दिया गया।
शिलापट्ट पर लागत की धनराशि अंकित नहीं है। निर्माण कार्य संपन्न होने के बाद कुछ दिन तक इसमें छुट्टा पशुओं को रखा गया और उनके आहार के लिए भूसा भी रखा गया था। देखभाल के लिए एक चौकीदार की तैनाती भी की गई थी।
जिला पंचायत की ओर से नियुक्त चौकीदार को मानदेय देने की बात कही गई थी। इसी बीच सभी पशुओं को लार के एक स्थान पर भेज दिया गया। इसमें कुल 25 पशु कागज में अंकित किए गए थे। पांच नवंबर 2025 को 14 पशु तथा सात नवंबर 2025 को 11 पशुओं को यहां से एक गाड़ी पर लोड कर भेज दिए गए। इसके बाद से इसे बंद कर दिया गया, जबकि नगर के 15 वार्ड से लेकर के ग्रामीण अंचलों में भी छुट्टा पशु घूम रहे हैं।
चौकीदार रामप्यारे यादव ने बताया कि सभी पशुओं को जिला पंचायत देवरिया के अधिकारी आए थे और पिकअप पर लदवाकर करके लेते गए। उसके बाद से इसके गेट पर ताला बंद है।