इस हादसे में तो सोनू शाह का पूरा कुनबा ही समाप्त हो गया, क्योंकि पिता सोनू शाह कार चला रहे थे और उनके बेटी, बेटा और पत्नी सभी की मौत हो गयी। इतना ही नहीं भाई और बहन दोनों हादसे में मर गए।
सोनू शाह के परिवार को इस हादसे ने गहरा जख्म दिया हैं। कार चला रहे सोनू के बगल में भाई बैठा था और पीछे की सीट पर पत्नी की गोद मासूम बेटा दिव्यांशु नींद में था। बेटी रूचिका और बहन खुशी एक साथ बैठी थी। वाहन की आमने-सामने टक्कर के बाद इतना भी मौका नहीं मिला कि कोई जीवित अस्पताल पहुंच सके। सभी एक साथ मौत की नींद सो गए। कार में मौजूद मोबाइल फोन के जरिए सभी की पहचान हुई। इसके बाद खबर गांव पहुंची।
संयोग से बच गया बड़ा भाई
शुक्रवार की शाम को कार से सोनू शाह का बड़ा भाई सुदामा भी कार से साथ में आ रहे थे। लेकिन कार में अधिक संख्या होने के कारण सुदामा को हल्द्वानी के पास ही उतर गए और ट्रेन में सवार हो गए। अभी वह रास्ते में ही थे कि सभी कार सवार की मौत हो गई। संयोग अच्छा था कि वह कार में नहीं थे।
रवि बोर्ड परीक्षा देने के बाद पहुंचा था भाई के पास
सोनू शाह का छोटा भाई रवि मार्च में माह में ही इंटर की परीक्षा समाप्त होने के बाद लालकुंआ गया था। वह वही पर पेंटर का काम करने लगा था। पूरा परिवार घर आ रहा था, इसलिए वह भी गांव आने की जिद्द कर दिया।
होली का रंग याद कर रो पड़े परिजन
सोनू शाह होली का त्योहार मनाने के लिए अकेले गांव आए थे। माता-पिता और पूरे परिवार गहरा नाता होने के कारण अक्सर घर पर आ जाया करते थे। होली के दिन पूरे गांव में घूम-घूम कर बड़ो का आर्शीवाद और छोटो के साथ हंसी ठठोली करने वाले सोनू की मौत के बाद गांव के लोगों को होली का रंग याद आने लगा। उनका हंसता हुआ चेहरा गांव के शैलेंद्र कुशवाहा, हिमांशु, मिथिलेश सिंह, प्रमोद शर्मा आदि रो पड़े। सभी उनकी शालीनता के बारे में चर्चा कर रहे थे।