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- घटना के बाद से मोहन व उनकी पत्नी बेटे को याद कर हो जा रहे थे बेहोश- मोहन के छोटे बेटे का घटना के बाद मेडिकल कॉलेज में चल रहा इलाज
- पूरी रात सिसवा पांडेय गांव से उठती रही सिसकियों की आवाज
- रतजग्गा करने के खुले आसामन तले पेड़ की छांव के नीचे अग्निपीड़ितों ने गुजारा दिन
संवाद न्यूज एजेंसी
पैकौली। सुरौली थाने के सिसवा पांडेय गांव में आग लगने के दौरान अपना बड़ा पुत्र गंवाने वाले मोहन प्रसाद की हालत शनिवार की सुबह बिगड़ गई। ग्रामीणों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। जहां इलाज के बाद उनकी स्थिति बेहतर है। वहीं, मृत किशोर की मां की भी हालत खराब है। वह बेटे को याद कर बार-बार बेहोश हो जा रही हैं। घटना में झुलसे मोहन प्रसाद के छोटे बेटे का इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है।
सिसवा पांडेय गांव में शुक्रवार की दोपहर में संदिग्ध परिस्थितियों में गेहूं के डंठल में लगी आग से मोहन प्रसाद की झोपड़ी जल रही थी। घटना के वक्त मोहन प्रसाद व उनकी पत्नी संगीता देवी घर पर नहीं मौजूद थीं। उनका बड़ा बेटा लक्ष्मण (15) व छोटा बेटा भरत (05) दोपहर होने के चलते झोपड़ी के अंदर सो रहे थे। लक्ष्मण की नींद खुली तो उसने छोटे भाई भरत को जगाकर जलती झोपड़ी से बाहर निकाला। इस घटना में भरत व लक्ष्मण दोनों झुलस गए थे। इसी बीच लक्ष्मण की नजर झोपड़ी में जल रही गाय पर पड़ी तो वह उसे बाहर निकालने के लिए जलती झोपड़ी में पहुंच गया। इसी बीच उसी के घर में मौजूद दो गैस के सिलिंडर ब्लास्ट कर गए और लक्ष्मण की जलने से मौत हो गई।
घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंचे मोहन व संगीता की हालत खराब हो गई। वह बेटे के शव को देख जमीन पर गिर पड़े। पिता की स्थिति घटना के बाद से ही खराब थी। पूरी रात मोहन व उनकी पत्नी संगीता बेटे की याद में रोते रहे। सुबह में अचानक मोहन की स्थिति खराब होने पर उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी।
उधर, उनकी पत्नी संगीता की हिम्मत जवाब दे बैठी है। वह एक बेटे को गंवाने व दूसरे इलाजरत बेटे की याद में रोए जा रही हैं। पति की तबीयत बिगड़ने के बाद से तो वह बार-बार बेहोश जा रही थीं।
अग्निपीड़ितों ने खुले में गुजारा दिन
आग लगने की घटना के बाद अपना-अपना आशियाना व उसमें सारा सामान गंवा देने वाले अग्नि पीड़ितों ने पूरी रात रतजगा कर गुजारी। उनके घर में खाने का एक दाना तक नहीं बचा था। बर्तन व अन्य सामग्री भी जलकर राख हो गई थी। शनिवार की सुबह गांव के लोगों नाज आदि की व्यवस्था कराई। कई ग्रामीणों ने बर्तन, कपड़ा आदि मुहैया कराया। इसके बाद अग्निपीड़ित रामा गोंड, रामप्रवेश, जैनुद्दीन, तपे, कृष्णमुरारी, रामहरख के परिजनों ने भोजन बनाया। इसके बाद दिन में तेज धूप व लू के थपेड़ों से बचने के लिए पेड़ आदि की छांव का सहारा लिया। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि पवन प्रसाद ने पीड़ितों से मिल बताया कि उनके आवास के लिए सेक्रेटरी से बात की है। जल्द ही उन्हें आवास मुहैया कराने का प्रयत्न करेंगे।
डीएम व एसपी ने पीड़ितों से मिलकर मदद का दिया भरोसा
शुक्रवार की देर शाम आग लगने की घटना में एक किशोर की मौत व सबकुछ जलकर राख हो जाने की सूचना पर डीएम अखंड प्रताप सिंह व एसपी सकंल्प शर्मा मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ितों का दुख साझा करते हुए हर संभव मदद का भरोसा दिया। डीएम ने स्थानीय कोटेदार को पीड़ितों को राशन मुहैया कराने के निर्देश दिए। इधर, हलका लेखपाल अनिल कुमार तिवारी ने बताया कि आग लगने से हुई क्षति का आकलन कर इसकी रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। लेखपाल के अनुसार पीड़ितों का खाता नंबर मिलते ही मुआवजे की राशि भेज दी जाएगी।
सरयू तट पर लक्ष्मण को दिया गया गंगा लाभ
पोस्टमार्टम के बाद मोहन प्रसाद के मृत पुत्र लक्ष्मण का शव सीधे बरहज सरयू नदी तट पर लाया गया। ग्रामीणों की मदद से शव बरहज के सरयू तट पर ले जाया गया। परिजनों की दयनीय हालत देख उसे गांव नहीं ले जाया। सरयू नदी तट पर लक्ष्मण के शव को गंगा लाभ दिया गया।