देवरिया। मिलावटी और केमिकल से पॉलिश हुई दाल बाजार में धड़ल्ले से बिक रही है। देखने में अच्छी और सेहतमंद मानकर जो दाल आप बाजार से खरीद रहे हैं, वह जहरीली हो सकती है। मिलावट खोरों ने दाल को लाल, पीले और काले रंग से रंगकर बेचना शुरू कर दिया है। केमिकल युक्त रंग के कारण पेट के रोग होने की आशंका बनी रहती है। खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग ने कई दुकानों से नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा है। इस बाद से मिलावटी खोरों में हड़कंप मचा हुआ है। दाल को प्रोटीन का स्रोत माना जाता है। ज्यादातर घरों में रोजाना दाल बनाई जाती है। इसके चलते जनपद में रोजाना 10 टन से अधिक दाल की खपत हो रही है। जिले में कम पैदावार और अधिक मांग के कारण दाल का रेट हमेशा ज्यादा रहता है।
व्यापारी सुरेश जायसवाल के अनुसार बाजार में अरहर दाल तीन से चार तरह की बिक रही है। अरहर की दाल 80 रुपये किलो, 100 रुपये किलो, 110 रुपये और 120 रुपये किलो वाली दाल बिक रही है। इस कारण मिलावटखोर दाल में खूब मिलावट करते हैं।
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अरहर की दाल में खेसारी की दाल की मिलावट आम बात हो गई है। पालिश के चलते लोग दाल की पहचान नहीं कर पाते हैं। ग्रामीण क्षेत्र में इस तरह की दाल की बिक्री आसानी से हो जाती है। ग्रामीण सस्ते के चक्कर में मिलावटी दाल खरीदते हैं।
9 नमूने हो चुके हैं फेल : अरहर और चना की दाल में खेसारी की दाल मिलावटी की शिकायत पर वर्ष 2024 जून माह में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने दाल के 9 नमूने लिए थे। इनमें से 3 नमूने अधोमानक और 4 नमूने असुरक्षित मिले।