धूमधाम से मना भगवान पुष्पदंतनाथ का जन्मोत्सव
खुखुंदू (देवरिया)। जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंतनाथ महाराज की जन्मस्थली खुखुंदू (प्राचीन नाम काकंदी) में मंगलवार को उनके जन्मोत्सव पर जन्म कल्याणक महोत्सव का आयोजन किया गया। इसमें कोलकाता, पटना, दरौली, मध्यप्रदेश, दिल्ली, अयोध्या, प्रयागराज और गोरखपुर सहित अन्य स्थानों से बड़ी संख्या में जैन धर्म के अनुयायी शामिल हुए। सुबह सर्वोषधि से भगवान का महामस्तकाभिषेक हुआ। इसके बाद विधि पूर्वक पूजन-अर्चन शुरू हुआ।
हर साल की तरह इस वर्ष भी नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंतनाथ के जन्मोत्सव पर बड़ी संख्या में जैन धर्म के अनुयायी पहुंचे। मंगलवार सुबह शुरू हुए जन्मोत्सव कार्यक्रम में सबसे पहले भगवान का जल, नारियल जल, इच्छू रस (गन्ने का रस), घृतरस, दूध, दही और फिर सर्वोषधियों से महामस्तकाभिषेक किया गया। फिर चंदन, पुष्पवृष्टि, सुगंधित जल से भगवान की मंगल आरती की गई। इसके बाद अष्ट द्रव्य से विधि पूर्वक पूजन-अर्चन शुरू हुआ। भगवान का जल, चंदन, अक्षत नैवेद्य, पुष्प, धूप, दीपक, फल और जयमाला अर्घ्य से पूजन किया गया। पुष्पदंतनाथ की प्रतिमा पर अंजू जैन, सरिता जैन, हेमलता जैन, शिल्पी जैन, शिवांगी अग्रवाल और सौरभ जैन ने पंचामृत से अभिषेक किया। दोपहर तक पूजन-अर्चन चलता रहा।
जन्मोत्सव कार्यक्रम में गोरखपुर से महावीर जैन, पोखराज जैन सेठी, शिखर जैन, रोहित जैन, सुशील जैन, दिल्ली से आयुष जैन, कोलकाता से मनीष जैन, हस्तिनापुर से पिंकू जैन, पटना से राजकुमार जैन, अयोध्या से मनोज जैन, मध्यप्रदेश जबलपुर से सत्येंद्र जैन, दरौली से अभिनाश जैन प्रमुख रूप से शामिल हुए। इसके अलावा अन्य विभिन्न जगहों से दिनभर जैनधर्म के अनुयायियों का आना-जाना लगा रहा। मंदिर के प्रबंधक बसंत लाल जैन ने बताया कि प्रत्येक वर्ष भगवान का जन्मोत्सव कार्यक्रम अगहन शुक्ल एकम के दिन मनाया जाता है।
खुखुंदू में जन्मे थे भगवान पुष्पदंतनाथ
खुखुंदू जैन मंदिर में स्थापित कीर्ति स्तंभों और शिलापट्टों पर अंकित मान्यताओं के अनुसार यहां इक्ष्वाकुवंशीय क्षत्रिय महाराजा सुग्रीव (रामायण वाले नहीं) व उनकी रानी जयरामा रहती थीं। रानी जयरामा के गर्भ से ही करोड़ों वर्ष पूर्व नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंतनाथ का जन्म हुआ। जन्म के समय सौधर्म इंद्र आदि देव-देवियों ने यहां रत्न की वर्षा कर प्रभु के कल्याणक महोत्सव मनाएं। भारत के दिगंबर जैन में काकंदी नगर का विस्तृत विवेचना मिलता है। यहां के घने जंगलों में भगवान पुष्पदंत नाथ ने वर्षों तपस्या किया। वे जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर हुए।
देशी घी के 108 दीपों से हुई भगवान की आरती
भगवान के जन्मोत्सव कार्यक्रम में देरशाम को पुष्पदंतनाथ महराज के मंदिर में स्थापित प्रतिमा की 108 देशी घी के दीपों से भव्य आरती की गई। इसके बाद उपस्थित श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद वितरण किया गया। प्रबंधक बसंत लाल जैन ने बताया कि दिनभर चले पूजन-अर्चन के बाद शाम को भगवान की भव्य आरती की गई। कार्यक्रम में भंडारे का भी आयोजन किया गया था। उन्होंने बताया कि भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव शांति पूर्वक संपन्न हुआ।