- भागलपुर बाजार का मामला, पुलिस की मौजूदगी में हुई कार्रवाई, ग्रामीणों ने जताया विरोध
भागलपुर। बाजार में बुधवार को दिन भर गहमा-गहमी रही। सिविल कोर्ट के आदेश पर संतोष सैनी की जमीन पर वर्षों से लगी पान की गुमटी को हटवा दिया गया। यह कार्रवाई कोर्ट अमीन और पुलिस की मौजूदगी में हुई। गुमटी हटते ही जमीन मालिक को कब्जा दिला दिया गया। वहीं कार्रवाई के दौरान रास्ते को लेकर ग्रामीणों ने विरोध भी जताया।
भागलपुर बाजार में संतोष सैनी पुत्र स्व. जगदीश प्रसाद सैनी की जमीन है। आरोप है कि बाजार के ही एक लक्ष्मी चौरसिया ने करीब सैकड़ों साल पहले से जमीन पर पान की गुमटी थी। इस पर संतोष सैनी ने साल 2001 में देवरिया दीवानी न्यायालय में बेदखली का वाद दायर किया था। करीब 26 साल तक चली सुनवाई के बाद सिविल जज जूनियर डिवीजन ने 7 सितंबर को संतोष सैनी के पक्ष में फैसला सुनाया और जमीन को कब्जा मुक्त कराकर वादी को कब्जा दिलाने का आदेश पारित किया था।
कोर्ट के आदेश की प्रति लेकर संतोष सैनी ने कब्जा दिलाने की मांग की थी। बुधवार को कोर्ट द्वारा नियुक्त अमीन दुर्गेश मणि त्रिपाठी, भागलपुर पुलिस चौकी प्रभारी अजय राय फोर्स के साथ दोपहर 11 बजे मौके पर पहुंचे। पहले अमीन ने कोर्ट के आदेश को मौके पर मौजूद लोगों को पढ़कर सुनाया। इसके बाद जेसीबी मंगाकर पान की गुमटी को हटवाया। अंदर रखा सामान बाहर निकलवाया गया। करीब एक घंटे की कार्रवाई के बाद जमीन को पूरी तरह खाली कराकर संतोष सैनी को सुपुर्द कर दिया गया। इस दौरान बाजार में सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई।
रास्ते के लिए हुआ हंगामा
कार्रवाई के दौरान ही दूसरा विवाद खड़ा हो गया। ग्रामीणों का कहना था कि जिस जमीन से गुमटी हटाई गई है, उसी के बगल से गांव का मुख्य रास्ता जाता है। जिससे रोज हजारों लोग आते-जाते हैं। अगर पूरी जमीन पर बाउंड्री कर दी गई तो रास्ता बंद हो जाएगा। इसको लेकर ग्रामीणों ने मौके पर ही अमीन और पुलिस से बहस की।
ग्रामीणों का कहना था कि यह रास्ता पिछले सैकड़ों सालों से बाजार आने-जाने के लिए उपयोग हो रहा है। इसे बंद नहीं होना चाहिए। प्रशासन को रास्ते की पैमाइश करनी चाहिए।
इस पर कोर्ट अमीन ने लोगों को समझाया कि उनका काम सिर्फ कोर्ट के आदेश का अनुपालन कराना है। रास्ते का मामला अलग है, जिसके लिए वे एसडीएम या कोर्ट में प्रार्थना पत्र दे सकते हैं। पुलिस ने लोगों को शांत कराया। जमीन मालिक संतोष सैनी ने कहा कि यह जमीन मेरी है और कोर्ट ने मुझे न्याय दिया है। मैंने किसी का रास्ता नहीं रोका है। गुमटी दुकानदार लक्ष्मी चौरसिया ने बताया कि हम गांव सभा की जमीन पर गुमटी रखे थे। कोर्ट फैसला दिया है तो मानना ही पड़ेगा।