देवरिया। अदरक की खराब फसल का फायदा धंधेबाज उठा रहे हैं। बंगलूरू से थोक में अदरक मंगाकर इसे एसिड से चमकाकर बाजार में बेचा जा रहा है। मंडी में सबसे अच्छी क्वालिटी की बताकर थोक में 60 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचा जा रहा है। ग्राहक चमकता अदरक देखकर झांसे में आ रहे हैं और धंधेबाज मुनाफा कमा रहे हैं। खास बात यह है कि फुटकर विक्रेता भी इसे 20 रुपये पाव बेचकर ग्राहकों को झटका देने में पीछे नहीं हैं।
गुजरात और महाराष्ट्र में इस बार अदरक की फसल खराब हुई तो धंधेबाजों की चांदी हो गई है और वह इससे मोटा मुनाफा कमाने की जुगत में जुट गए हैं। अदरक की मांग पूरे साल रहती है, लेकिन सर्दियों में इसकी खपत और बढ़ जाती है। चाय में स्वाद के अलावा यह खांसी ठीक करने एवं अन्य औषधीय खाद्य सामग्री बनाने में भी उपयोग किया जाता है। आम से लेकर खास लगभग हर घर में यह पाया ही जाता है। देश में अदरक की सबसे अच्छी खेती गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक व मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में होती है।
बीआरडी पीजी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो.हरिशंकर गोविंद राव बताते हैं कि प्रति एकड़ अदरक की बुवाई पर करीब 50 हजार रुपये का खर्च आता है। इसका प्रति एकड़ उत्पादन करीब 15 टन होता है। इस साल खराब मौसम के चलते न केवल अदरक का उत्पादन घटा है, बल्कि क्वालिटी भी खराब हुई है। इसका नुकसान किसान उठा रहे हैं। बंगलूरू की थोक मंडी में यह 50 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही है, जबकि कम गुणवत्ता वाली हाईब्रिड किस्म वाली अदरक 20-22 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव मिल जा रहा है। इसे प्रयागराज लाने और एसिड से धुलकर फिर गोरखपुर मंडी और इसके बाद आसपास के अन्य जिलों की मंडियों में भेजने में करीब 20 रुपये प्रति किलोग्राम का खर्च आता है।
शहर के नवीन मंडी में अदरक का काम करने वाले मनीष सोनकर ने बताया कि देवरिया मंडी में छोटे वाहन ही आते हैं। यहां अदरक ट्रक से नहीं आता। हर दिन 20 से 30 क्विंटल माल खप जाता है। बंगलुरू से ट्रक सीधे गोरखपुर आता है वहीं से आसपास के जिलों के मंडियों में छोटे वाहनों से पहुंचता है। बंगलुरू से एक ट्रक माल पांच लाख में लोड होता है। गोरखपुर आते-आते इसकी कीमत दोगुनी हो जाती है। जिलों की मंडी तक पहुंचते- पहुंचते दुकानदारों को 60 रुपये किलो के भाव मिलती है। ऐसे में गोरखपुर के कारोबारी को प्रति ट्रक करीब एक लाख 40 हजार रुपये का फायदा मिल जाता है।