देवरिया जिले के रवींद्र किशोर शाही स्पोर्ट्स स्टेडियम में वर्ष 2012 में 50 लाख रुपये की लागत से बना बास्केटबाॅल कोर्ट बिना खेले ही खराब हो गया है। खेल निदेशालय की लापरवाही का आलम यह रहा कि 13 साल से यहां किसी प्रशिक्षक की तैनाती तक नहीं की गई। अब हालत यह है कि इसका सिंथेटिक कोर्ट जगह-जगह से टूट रहा है। अब यह मरम्मत की बाट जोह रहा है।
स्टेडियम में जब यह कोर्ट बना तो उम्मीद जगी कि इससे जनपद में बास्केटबाॅल खेल की नर्सरी तैयार करने में मदद मिलेगी। हालांकि, 12 सत्र बीत चुके हैं और 13वां समाप्ति की ओर है। कोरोना काल के बीते दो सत्र छोड़ दें तो बीते दस सत्र में खेल निदेशालय की ओर से यहां एक प्रशिक्षक की तैनाती तक नहीं हो पाई। इससे यहां नेशनल तो दूर जिले स्तर के भी बास्केटबाॅल खिलाड़ी नहीं तैयार किए जा सके।
निर्माण के दौरान खिलाड़ी चोटिल न हों, इसके लिए दक्षिण कोरिया से आए इंजीनियर ने रबर की गिट्टियां बिछाने का कार्य किया था। खास बात यह है कि करीब 13 एकड़ में फैले स्टेडियम में इस कोर्ट के निर्माण के बाद ग्राउंड भी अन्य खेलों के लिए छोटा हो गया। सीनियर खिलाड़ी तो यहां तक आरोप लगाते हैं कि केवल पैसे को खपाने के लिए यहां पर यह कोर्ट बना दिया गया। जिम्मेदारों ने इसे आगे बढ़ाने के लिए अन्य जरूरी सुविधाएं मयस्सर नहीं कराईं।
अमन यादव ने बताया कि जनपद में बास्केटबाॅल खेल आगे बढ़े, इसीलिए इस कोर्ट का निर्माण हुआ था। हालांकि, इतने वर्षों के बाद भी एक प्रशिक्षक तक की तैनाती नहीं हो पाना खेल के जिम्मेदारों की मंशा पर सवाल खड़े करता है। जब खिलाड़ी को प्रशिक्षक सहित अन्य सुविधाएं ही नहीं मिलेंगी तो उसका खेल आगे कैसे बढ़ेगा।
संजना खरवार ने बताया कि लाखों रुपये खर्च कर बास्केटबाॅल कोर्ट बन तो गया, इससे ग्राउंड भी छोटा हो गया। सिंथेटिक कोर्ट की गिट्टियां जगह-जगह से उखड़ चुकी हैं। जब प्रशिक्षक नहीं देना था तो यहां इसे बनाया ही क्यों गया। समझ में नहीं आता ऊपर बैठे अधिकारी खेल को आगे बढ़ाने के लिए कौन सी सोच लेकर कार्य करते हैं।
क्रीड़ाधिकारी राज नारायण प्रसाद ने कहा कि शासन की ओर से बास्केटबाॅल कोर्ट की मरम्मत के लिए धन स्वीकृत किया गया है। जल्द ही यह कार्य शुरू भी हो जाएगा। यहां इस खेल में प्रशिक्षक तैनाती के लिए खेल निदेशालय को पत्र लिखा गया है।