बड़ौदा यूपी बैंक के शाखा प्रबंधक समेत दो पर जालसाजी का केस
बनकटा (देवरिया)। स्थानीय बड़ौदा यूपी बैंक के एक खाताधारक के खाते से शाखा प्रबंधक की मिलीभगत से जालसाजी कर 11.95 लाख हड़प लिए जाने के मामले में पुलिस ने शाखा प्रबंधक और पीड़ित के गांव के ही निवासी एक शख्स पर जालसाजी समेत कई धाराओं में मुकदमा दर्ज कर किया है।
कुरमौली उर्फ बख्शी गांव के निवासी राजदेव पांडेय पुत्र जलेशर पांडेय का बड़ौदा यूपी बैंक बनकटा स्थित शाखा में बचत खाता है। राजदेव पढ़े-लिखे नहीं हैं और अंगूठे के इस्तेमाल से अपना खाता संचालित करते हैं। आरोप है कि शाखा प्रबंधक ने सोची समझी साजिश के तहत उनके गांव के निवासी एक व्यक्ति से मिलीभगत कर कूट रचना एवं जालसाजी द्वारा उनके खाते से अलग-अलग तिथियों में कुल 11.95 लाख रुपये निकाल लिए। इसमें कुछ रकम कैश निकासी की गई। जबकि बाकी रकम अलग-अलग खाते में ट्रांसफर किए गए। पीड़ित को जब मामले की जानकारी हुई तो उसके होश उड़ गए। पीड़ित का यह भी आरोप है कि उसके गांव के निवासी एक व्यक्ति ने उसका हितैषी होने का सब्जबाग दिखाकर बिना पैसा दिए उसका तीन कट्ठा जमीन भी बैनामा करा लिया तथा उसी व्यक्ति ने उसके बेचे गए कुछ जमीनों के रुपये शाखा प्रबंधक से मिली भगत कर हड़प लिया।
बाद में पीड़ित ने पुलिस एवं बैंक के उच्चाधिकारियों से मामले की जांच कर कार्रवाई की मांग की। मामले में कोई कार्रवाई नहीं होने पर उसने एसपी के यहां गुहार लगाई थी। एसपी के निर्देश पर जब पूरे मामले की जांच हुई तो प्रथम दृष्ट्या आरोप सही पाए गए। पीड़ित की शिकायत पर बैंक के शाखा प्रबंधक आरके मिश्रा और पीड़ित के गांव कुरमौली उर्फ बख्शीगांव निवासी हृदयानंद ओझा पर पुलिस ने धोखाधड़ी सहित अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। एसओ गोपाल प्रसाद ने शनिवार को बताया कि मामले में शाखा प्रबंधक समेत दो लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।
इसी शाखा से हुआ था मृत खाताधारक के वृद्धा पेंशन का भुगतान
बड़ौदा यूपी बैंक के इसी शाखा से क्षेत्र के इंगुरी सराय गांव निवासी वृद्धा पेंशन के एक लाभार्थी की मृत्यु के बाद उसके खाते से अलग-अलग तिथियों में 52 हजार सात सौ रुपये के भुगतान का मामला पिछले साल सामने आया था। गांव के वृद्धा पेंशन के लाभार्थी रहे रामनरेश की मृत्यु हो गई थी। परिवार रजिस्टर में उनकी मृत्यु 11 फरवरी 2010 को दर्ज हो चुकी थी। लेकिन उनके खाते से मृत्यु के नौ साल बाद तक अलग-अलग तिथियों में 52700 रुपये की निकासी की गई थी। इस मामले में भी बैंककर्मियों के संलिप्त होने की बात उस समय सामने आई थी।
बैंक प्रबंधक के पक्ष में आया क्षेत्रीय कार्यालय
बड़ौदा यूपी बैंक के देवरिया स्थित क्षेत्रीय कार्यालय प्रबंधक जेएन त्रिपाठी ने बताया कि इस मामले में बैंक प्रबंधक की भूमिका कोई गलत नहीं है। मुकदमा भले दर्ज हो गया हो, साबित नहीं हो पाएगा। पीड़ित व्यक्ति ने खुद ही हस्ताक्षर कर कई बार में बैंक से रुपये निकाले हैं। यह बैंक प्रशासन की जांच में साबित हुआ है। वह व्यक्ति बैंक प्रबंधक के पीछे कई महीनों से पड़ा हुआ था। उच्चाधिकारियों को भी इस मामले की जानकारी दे देे गई है।