रामलक्षन/रुद्रपुर। नोट बंदी से उपजे नकदी संकट से लोगों को नोट के लिए जाड़े की रात में ठंड की चोट खानी पड़ रही। ग्रामीण क्षेत्र के बैंकों पर रुपया निकालने के लिए आधी रात से लाइन लगनी शुरू हो जा रही है। बैंक के सामने रात को लोग रजाई लेकर सो रहे हैं। यहां लाइन लगाने के लिए ईंट का टुकड़ा रखकर जगह कब्जा कर रहे हैं।
मंगलवार की रात ‘अमर उजाला’ ने रामलक्षन में स्थित बैंकों का जायजा लिया। रात को एक बजे पूर्वांचल बैंक पर लाइन लग गई थी। बैंक के इर्दगिर्द लोग रजाई लेकर जाड़े की रात में जमे रहे। बैंक के मुख्य गेट से ईंट का टुकड़ा रखकर लाइन में निशान बना दिया गया। जो जैसे आता गया अपना ईंट रख कर कोने में दुबक जाता। आधी रात से शुरू लाइन लगाने का सिलसिला सुबह चार बजे तक चलता रहा। चार बजते-बजते बैंक पर रुपये निकालने वालों की लंबी लाइन लग गई। अवधपुर गांव की संती देवी ने कहा कि वह रात के 12 बजे बैंक पर पहुंच गई।
कई दिनों से बैंक का चक्कर काट रही हूं। रुपये नहीं मिलने से खेत की बुआई नहीं हो पा रही है। नौका टोले के सुरेंद्र निषाद के घर बुधवार को बेटी की बारात आने वाली है। वह बैंक के मुख्य गेट पर चादर ओढ़ कर बैठे थे। कहा कि पांच दिन से बैंक से लौट रहे हैं। आज रुपये लेकर ही जाएंगे नहीं तो दरवाजे की इज्जत चली जाएगी।
लक्ष्मीपुर की लालमती देवी, चनगहा के अवधेश, छपौली के पिंटू, सरहसबह के विकास, रैश्री के राकेश, रामनगर के मोती चंद, सोनू यादव, लवंगी देवी, रिंकी सहित दर्जनों गांवों के करीब 50 लोग आधी रात से बैंक पर बैठकर सुबह होने का इंतजार कर रहे थे। इन सभी लोगों को जरूरी काम के लिए रुपये की दरकार है। सुबह तीन बजे तक बैंक के सामने लंबी लाइन लग गई। नोट के लिए जाड़े की रात में ठंड की चोट खा रहे लोग व्यवस्था को कोस रहे थे।