सिद्धार्थनगर। खुशियों के पर्व होली में गुझिया मिठास बढ़ाने के लिए तैयार है। खोआ से बनी गुझिया और मिठाइयों की मांग अधिक रहती है। ऐसे में होली के ठीक पहले धंधेबाज मांग का भरपूर फायदा फायदा उठाने के लिए मिलावटी खोआ की खेप बाजार में उतारने को तैयार हैं। कड़ी निगरानी और खाद्य विभाग की लगातार जांच से बचने के लिए धंधेबाज अब डोर-टू-डोर डिलेवरी की सुविधा भी उपलब्ध कराने लगे हैं। इसके लिए बसों के बजाए छोटे वाहनों और पिकअप का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे किसी की नजर न पड़े और आसानी से माल अपने ठिकाने तक पहुंच भी जाए। बीती दीपावली में जनपद में कई हिस्सों में संदिग्ध खोआ और खराब मिठाइयां मिलीं थीं। इस बार भी धंधेबाज पहले से ही मिलावट के बाजार में अपना जाल फैलाने में लग गए हैं।
कानपुर, बलरामपुर, अयोध्या से लाकर जनपद में छोटी- छोटी दुकानों के जरिये लोगों तक मिलावटी खोआ खपाने के लिए नेटवर्क तैयार कर लिए हैं। दूध का काम करने वाले रमेश यादव के मुताबिक मिलावट का असली केंद्र कानपुर है, जहां से प्रदेश के कई जनपदों को आपूर्ति होती है। पहले रोडवेज की बस की आपूर्ति होती थी। लेकिन, लगातार धर पकड़ बढ़ने के बाद अब धंधेबाजाें ने डिलीवरी का तरीका बदल दिया है। ऐसे में अब पिकअप और अन्य बंद छोटे वाहनों से आपूर्ति की जा रही है।
इसमें ऑर्डर लगाने के बाद माल आता है और छोटे चौराहों और कस्बों में लोकेशन पर खड़ा कर दिया जाता है। धंधा करने वाले मकान या दुकान में माल स्टोर कर लेते हैं। इसके बाद छोटे- छोटे हिस्से में करके मांग के हिसाब से दुकानों को सप्लाई करते हैं। पहले माल के साथ रुपये देने पड़ते थे। अब डिलीवरी के साथ ऑनलाइन भुगतान हो जाता है। इसके साथ ही आयोध्या, बलरामपुर और गोरखपुर व बस्ती का माल भी इसी तरह से जनपद में आ रहा है। यूं तो धंधा साल भर हो रहा है, लेकिन त्योहार में अगल चेन काम करती है। बाकी अबतक डिमांड के अनुसार लग्न में भी आपूर्ति की जा रही है। एक त्योहार में लाखों रुपये का कारोबार हो जाता है।
दूध का उत्पादन न के बराबर, खोआ जितना चाहिए मिलेगा
जिले में दूध उत्पादन का कोई बड़ा स्रोत नहीं है। जिन्होंने पशु पालन किया है, वह खुद इसका इस्तेमाल कर लेते हैं, लेकिन खोआ और दूध भारी मात्रा में बाजारों में उपलब्ध है। आप केवल ऑर्डर कीजिए, जितनी डिमांड करेंगे, पर्याप्त मात्रा में खोआ और पनीर मिल जाएगा। मिठाई के काराेबार से जुड़े सुरेश मोदनवाल के मुताबिक, मिठाई का काम करने वाले दुकानदारों का कहना है कि जिले में दुकानदार कानपुर, गोरखपुर और बलरामपुर जिले के पचपेड़वा से खोआ मांगते हैं। इसमें 220 से 220 रुपये किलो की दर दुकानों पर देते हैं जबकि, असली खोआ की बात करें तो यह 350 रुपये प्रतिकिलो तक पड़ जाता है। दुकानदारों का यह भी कहना है कि यहां के खोआ की कोई गारंटी नहीं है। अभी पिछले साल दीपावली में शोहरतगढ़ 35 किलो खोआ बरामद किया गया। जांच में महक लाने के लिए केमिकल, आटा आदि मिलाए जाने की बात सामने आई थी। इसके अलावा कानपुर सप्लाई का बड़ा मंडी की आपूर्ति का सेंटर है। पूर्व में बांसी रोडवेज पर कई बार खेप बरामद की जा चुकी है। पिछले कुछ समय से रोडवेज पर माल पकड़ा नहीं गया है, लेकिन जांच में कभी सिंडिकेट का राज नहीं खुल सका। खोआ किसका था और किसने भेजा था, इसके बारे में जांच आगे नहीं बढ़ सकी।
यह है नियम पर नहीं होता है पालन
जानकारों के मुताबिक खोआ और उससे बनने वाली मिठाई, इसके अलावा दुकान पर नियमित बनाने वाली मिठाई लोगों को सही मिले। इसके लिए जनवरी 2021 में शासन की ओर से नियम लागू किया गया था। इसमें बताया गया है कि दुकान पर बनने वाली मिठाई कब बनी और कबतक बिक्री योग्य है। सभी दुकानदारों को मिठाई के आगे नोटिस चस्पा करने के निर्देश थे। लेकिन, यह आदेश केवल कागजों में सीमित रह गया है। दुकानों की पड़ताल की गई तो कई लोगों ने आदेश से अनभिज्ञता जाहिर की। दुकानदारों का कहना है कि उन्हें ऐसे किसी नियम के बारे में जानकारी नहीं।
इतने समय तक रख सकते हैं यह मिठाई
खाद्य सुरक्षा विभाग के जानकारों के मुताबिक दूध से बनने वाली मिठाई गर्मी में 24 घंटे तक खाने योग्य रहती है। अगर ठंड मौसम है तो 36 घंटे तक सेवन कर सकते हैं। वहीं खोआ से बनने वाली मिठाई एक सप्ताह तक रख सकते हैं। उससे अधिक समय होने पर खाने पर बीमार होने का खतरा रहता है जबकि दुकानों पर कई दिन का छेना, खोआ से बनी मिठाई और पनीर को स्टाॅक किया जा रहा है।
मिलावट की इस तरह से करें पहचान
खोआ में मिलावट की अधिक संभावना रहती है। इसकी पहचान के लिए खरीदते समय ग्राहक थोड़ा सा हाथ में ले लें। उसके बाद उसका गोली तैयार करें। अगर गोली बनाते समय हाथ चिकना हो रहा है तो समझिए की सही है। अगर गोली बनाने पर खुरदुरा है तो मिलावटी है।
मिलावटी से किडनी खराब होने तक का खतरा
मिठाई बनाने के लिए खोआ, घी, तेल, दूध, आर्टिफिशियल फ्लेवर और कलर का इस्तेमाल किया जाता है। मिठाई में इन सभी चीजों की क्वांटिटी बढ़ाने के लिए इनमें आर्टिफिशियल चीजें जैसे चॉक, यूरिया, साबुन और व्हाइटनर को मिलाया जाता है जो सेहत को कई तरह के नुकसान पहुंचाते हैं। दूषित मावा या अन्य सामग्री से बनी मिठाइयों का सेवन करने से ब्रेन कैंसर, माउथ कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर, ल्यूकेमिया, श्वास संबंधी बीमारियों और किडनी के रोगों का खतरा अधिक रहता है। मिलावटी मिठाई में स्टार्च, अनसैचुरेटेड फैट और कुछ खतरनाक चीजें मिलाई जातीं हैं, जिससे कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है। इस मिठाई से दिल के रोगों और स्ट्रोक का खतरा अधिक रहता है।
डॉ. एसके राव, विशेषज्ञ मेडिसिन विभाग
एक नजर कार्रवाई पर
बीते वर्ष अप्रैल से दिसंबर माह तक की रिपोर्ट की बात करें तो 156 मामलों में कार्रवाई हुई थी। इसमें एडीएम कोर्ट में मुकदमा चला। इसमें 152 मामलों में कार्रवाई करते हुए 22 लाख रुपये अर्थदंड की कार्रवाई की गई है। इधर हुए सैंपलिंग का रिपोर्ट आना बाकी है।
बोले जिम्मेदार
खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम लगातार जांच करती है। समय-समय पर छापामार अभियान चलाया जाता है। कार्रवाई भी की जाती है। होली त्योहार को देखते हुए छह टीम निरंतर कार्य कर रही हैं। जांच करके नमूना लिया जा रहा है। रिपोर्ट आने के बाद जिन दुकानों में मिलावटी खोआ या मिठाई पाई जाती है, दुकानदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है।
- आरएल यादव, सहायक उपायुक्त, खाद्य सुरक्षा विभाग