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Deoria News: जेल की चहारदीवारी में गढ़ेंगे भविष्य...बाहर फैलेगा शिक्षा का उजियारा

Mon, 23 Feb 2026 01:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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सिद्धार्थनगर। अब पढ़ने की उम्र में जाने-अनजाने में सलाखों के पीछे सजा काट रहे कैदियों का भविष्य भी संवर सकेगा। उन्हें जेल में भी अपनी पढ़ाई करने का मौका मिलेगा, जिससे वह अपने भविष्य को सलाखों के पीछे काल-कोठरियों में बैठक भी गढ़ सकेंगे। जिला कारागार में बतौर शिक्षक कार्यरत उत्सव और जेल अधीक्षक के प्रयास के बाद जेल में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान (एनआईओएस) की ओर से शिक्षा देने के लिए मान्यता मिल गई है। ऐसे में जेल जाने वालों उन लोगों के सपनों को भी पंख लग सकेंगे जो पढ़ाना चाहते थे और किसी न किसी अपराध में सलाखों के पीछे चले गए।
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एनआईओएस के कोर्स शुरू होने के बाद अब जेल में कैदी बैठे-बैठे हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे और जेल से बाहर जाने के बाद उसी के सहारे अपने हाथ को मजबूत कर सकेंगे। जिला कारागार में मौजूदा समय में 578 कैदी और बंदी रखे गए हैं। किन्हीं प्रकार के अपराध में जेल में आने वालों में सुधार लाने के लिए एनजीओ और जेल प्रशासन की ओर से कई प्रकार की कार्यशाला का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही सिलाई, कढ़ाई, फर्नीचर, इलेक्ट्रिशियन के ट्रेड की ट्रेनिंग दी जाती है। इसके साथ ही जो पढ़ने में रुचि रखते हैं, उन्हें पढ़ाने के लिए शिक्षक की तैनाती की गई है।
जेल में शैक्षिक गतिविधियों के संचालन के लिए बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से शिक्षक के रूप में उत्सव तिवारी की तैनाती की गई है। बतौर शिक्षक उत्सव की ओर से जेल में आने वाले उन लोगों को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा ग्रहण कराने पर जोर दिया जो पढ़ाई के बीच में किन्हीं आपराधिक मामले में जेल आए। वह पढ़ना तो चाहते हैं, लेकिन उनके सपने साकार नहीं हो पा रहे थे। जेल अधीक्षक की ओर से राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान एनआईओएस की मान्यता के लिए शासन को पत्राचार किया गया था। शासन की ओर से जिला कारागार को मान्यता मिल गई है। अब यहां पर हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा जेल में रहते हुए हासिल कर सकेंगे। उत्सव तिवारी उनकी क्लास लेंगे और परीक्षा के लिए तैयार किया जाएगा। इसके पीछे उद्देश्य है कि जेल से बाहर जाने के बाद वह आईटीआई सहित अन्य शिक्षा ग्रहण कर सकें या फिर उसी डिग्री के सहारे उन्हें सरकार की योजनाओं के तहत ऋण मिल सके और फिर से वह समाज की मुख्यधारा से जुड़ सके।
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जेल से बाहर निकलने के बाद दे सकेंगे परीक्षा
जेल में रहते हुए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए पंजीकृत होने वाले अगर जेल से छूट जाते हैं तो उसके बाद भी उन्हें जेल में आकर परीक्षा देने की सुविधा रहेगी। जेल प्रशासन अन्य छात्रों की की तरह से उनकी भी परीक्षा कराएगा। उत्तीर्ण होने के बाद वह जेल में आकर अंक पत्र प्राप्त कर सकेंगे। इस शिक्षा में यह व्यवस्था है। शिक्षक उत्सव के अनुसार आवेदन के लिए पोर्टल खुलने वाला है। 14 कैदियों को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के लिए तैयार किया गया है जो आगे की पढ़ाई करने के इच्छुक हैं।

निशुल्क आवेदन की सुविधा
इस संस्थान से कोई भी पढ़ाई कर सकता है, लेकिन जेल में निरुद्ध बंदी और कैदी के लिए यह शिक्षा निशुल्क है। उनको आवेदन करना है। इसके बाद विद्यालय की ओर से पढ़ाई के लिए किताब कॉपी सब एक सेट में उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद जेल में रहते हुए पढ़ाई कर सकेंगे और परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

जिला कारागार में राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय संस्थान एनआईओएस की मान्यता मिल गई है। इसके लिए कारागार में तैनात शिक्षक की ओर से प्रस्ताव तैयार किया गया था। जिसके लिए हमारे स्तर से पत्राचार हुआ था। अब हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की पढ़ाई के इच्छुक बंदी व कैदी जेल में रहते हुए शिक्षा ग्रहण कर सकेंगे।
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- सचिन वर्मा, जेल अधीक्षक सिद्धार्थनगर
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