तरकुलवा। कस्बे के शिवाजी नगर जमुनी निवासी 50 वर्षीय राम प्रताप की आठ दिन पहले दुबई में हृदयगति रुकने से मौत हो गई थी। शुक्रवार को उनका शव गांव लाया गया तो कोहराम मच गया।
पत्नी, बच्चों और परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। पत्नी गीता बेहोश हो जा रही थी। छोटी गंडक नदी के सोनहुला रामनगर घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि बड़े बेटे निखिल ने दी।
शिवाजी नगर जमुनी निवासी रामप्रताप दुबई की एक पाइपलाइन कंपनी में सुपरवाइजर थे। घर पर पत्नी गीता देवी, बेटे निखिल, नीतीश व बेटी रानी रहते थे। सबकुछ ठीक चल रहा था, मगर एक झटके में सबकुछ बिखर गया।
28 मई को रामप्रताप कंपनी में काम करने गए थे। काम खत्म कर जब वह कमरे पर पहुंचे तो अचानक उनके सीने में तेज दर्द शुरू हुआ।