देर से ही सही न्याय मिला, निर्भया की मां का संघर्ष रंग लाया
देवरिया। तमाम तिकड़मों के बाद आखिरकार निर्भया के दोषियों की फांसी की सजा मिल ही गई। एक मां का सात साल तक किया गया संघर्ष रंग लाया। उस मां ने बेटी के लिए जो किया, वह समाज के लिए नजीर बनेगा। उसने जो सहा है, भगवान न करें, किसी को इस स्थिति से गुजरना पड़े। उसने अपनी इच्छा शक्ति और सोच से बता दिया कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन अंत में जीत उसी की होती है।
यह विचार शहर की उन महिलाओं एवं युवतियों के हैं, जिन्हें वर्ष-2012 में दिल्ली में घटी इस घटना को सुनकर अंदर से हिल गई थीं। देश के विभिन्न हिस्सों में बढ़ रहे दुष्कर्म, छेड़छाड़, दहेज हत्या की घटनाएं इन्हें द्रवित कर देती हैं। शुक्रवार को अमर उजाला अपराजिता-100 मिलीयन स्माइल्स अभियान के तहत न्यू कॉलोनी के हिप-हॉप डांस एकेडमी में आयोजित संवाद कार्यक्रम में मौका मिला तो उन्होंने निर्भया मामले, महिलाओं के प्रति बढ़ते अत्याचार और वर्तमान में कोरोना वायरस से बचाव विषय पर खुलकर अपनी बात रखी और विपरित परिस्थितियों के बावजूद खुद को और अन्य महिलाओं को भी सशक्त बनाने का संकल्प लिया।
मॉडलिंग के क्षेत्र में कार्य करने के अलावा एक एनजीओ चला रहीं अर्चना सिंह ने कहा कि सात साल बाद निर्भया की आत्मा को अब शांति मिली होगी। सही इंसाफ हुआ है। बेटी को खो देने और इतना कुछ सहने के बाद एक मां को आखिरकार न्याय के लिए कहां-कहां नहीं जाना पड़ा। छात्रा प्रगति सिंह ने कहा कि निर्भया की मां अब चैन की नींद ले सकेंगी। फांसी के बाद गैंगरेप की सोच रखने वालों को सबक मिलेगा। गृहिणी बिंदु सिंह के कहा कि दुष्कर्म के अन्य मामले भी हैं, इसमें भी सुनवाई में तेजी लाकर दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। गृहिणी सीमा सिंह ने बताया कि और पहले फांसी हो जानी चाहिए थी। ऐसे मामलों की सुनवाई में न्याय पालिका को और तेजी दिखानी चाहिए। गृहिणी सरिता प्रजापति ने कहा कि यह पल महिलाओं के लिए एतिहासिक है। लग रहा है कि सरकार महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर है। कोरियाग्राफर आलिया त्रिपाठी ने कहा कि बहुत ही अच्छा हुआ है, देर से ही सही दोषियों को फांसी मिलने से हम सभी काफी खुश हैं। डीएलएड छात्रा नम्रता उपाध्याय ने कहा कि सभी आरोपियों को मौत की सजा होना देश की हर महिला, बेटी के लिए गर्व की बात है। शिखा त्रिपाठी ने कहा कि इंसाफ मिलने से न्याय की जीत हुई है। अंत में सभी ने कोरोना वायरस से बचाव के लिए सावधानी बरते और दृढ़ता से इस स्थिति का सामना करने का भी संकल्प लिया।
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स्पीकअप
निर्भया मामले में न्याय और जल्दी आ जाता तो अच्छा होता। उम्मीद है कि आगे से ऐसी घटनाओं को अंजाम देने से पहले दूषित मानसिकता वाले सौ बार सोचेंगे। आरोपियों को फांसी से भी कोई बड़ी सजा होती हो तो वह भी मिलनी चाहिए थी।
..सुरभि गुप्ता, छात्रा
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एक मां पर क्या बीती है, यह बात वही समझ सकती है। सोचकर ही हम सभी सहम जाते हैं। एक महिला ने अपने संघर्षों के बल पर बेटी को न्याय दिलाने के लिए जो किया, वह समाज के अनुकरणीय बनेगा। अन्य महिलाएं भी इससे और मजबूत होंगी।
... निधि सिंह, डीएलएड छात्रा
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हैदराबाद की घटना के बाद भी हम सभी बहुत खुश हुए थे। वहां की पुलिस ने जो किया, वह अन्य ऐसी घटनाओं के मामले में किया जाना चाहिए। तभी ऐसी घटनाएं रुकेंगी और दुष्कर्म करने वाले डरेंगे।
..नेहा सिंह, डीएलएड छात्रा
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फांसी हो जाने की बात सुनकर राहत मिली है। यह एक घर की बात नहीं, पूरे देश की है। अब साबित हो गया कि देश में भी कानून का राज है, लेकिन ध्यान रखना होगा और ऐसी व्यवस्था बने कि फिर किसी मां की बेटी को ऐसी प्रताड़ना न सहनी पड़े।
..प्रीति बरनवाल, गृहिणी