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Deoria News: मेडिकल कॉलेज में एक और हार्मोनल जांच ठप, मरीजों की बढ़ी परेशानी

Mon, 16 Dec 2024 12:46 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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देवरिया। मेडिकल कॉलेज की पैथाॅलाेजी में एक और हार्मोनल जांच ठप हो गई है। यहां पहले से सात जांचें बाधित हैं। इसमें प्रोलैक्टीन की जांच को ठप हुए काफी दिन हो गए हैं। इसकी वजह से मरीजों को परेशानी हो रही है। रोजाना करीब साठ से अधिक मरीजों को निराश होना पड़ रहा है। उन्हें बाहर से जांच करानी पड़ रही है, जहां उन्हें करीब दोगुनी कीमत चुकानी पड़ रही है, जबकि अस्पताल में इन जांचों के लिए कम शुल्क जमा करना पड़ता है। कैलीब्रेटर की कमी से यह समस्या आई है। जांच न होने से मेडिकल कॉलेज को राजस्व का भी नुकसान हो रहा है।
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मेडिकल कॉलेज में मरीजों के ब्लड जांच के लिए पैथाॅलाेजी जांच की सुविधा है। अधिकांश जांच निशुल्क होती है, जबकि हार्मोनल जांच के लिए शुल्क निर्धारित किया गया है, जो निजी सेंटरों से कम है। यहां जांच की चौबीस घंटे सेवा है। अस्पताल में रोजाना शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्र के अलावा बिहार के सीमावर्ती इलाके के करीब तीन हजार लोग इलाज के लिए आते हैं। डॉक्टर जरूरत के समझने पर मरीजों की ब्लड जांच कराते हैं। प्रत्येक दिन करीब पांच रजिस्ट्रेशन होता है। इसमें महिला अस्पताल के मरीज भी शामिल होते हैं, जिसमें साठ से अधिक मरीजों की हार्माेनल जांच होती है। इधर करीब एक माह से कैलीब्रेटर खत्म हो गया है। इससे पैरामीटर मापा जाता है, ताकि जांच सही तरह हो सके। प्रोलैक्टीन की जांच ठप हुए करीब दो माह से अधिक समय हो गया। इसके अलावा सीए 125, एएफपी, पीटीएच, बीटा एचसीजी, इंसुलीन, विटामिन बी 12 जांच ठप है। इसमें प्रोटीन, महिलाओं में बच्चेदानी में कैंसर, प्रेगनेंसी से संबंधित सहित अन्य जांचें हैं। करीब दस दिन से फैरिटिन जांच भी बंद हो गई है।
महिलाओं में आयरन की कमी की आशंका होने पर यह जांच कराई जाती है। डॉक्टर मरीजों को जांच लिख रहे हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए कतार में खड़े होकर इंतजार करने के बाद जब बारी आ रही है तो उन्हें जांच न होने के बारे में पता चल रहा है। उन्हें मजबूरी में निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है, जहां इन जांचों के लिए उन्हें पांच से ग्यारह सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। फैरिटिन जांच के लिए अस्पताल में साढ़े तीन सौ शुल्क निर्धारित है, जबकि बाहर उनसे करीब सात सौ रुपये देना पड़ रहा है। इसकी वजह से उन पर आर्थिक बोझ पड़ रहा है। जांच शुरू होने से मरीजों को सहूलियत होगी। उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा और न अधिक रुपये खर्च करने पड़ेंगे।
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