संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज के ओपीडी बिल्डिंग के पांचवीं मंजिल पर पानी की टंकी में शव मिलने के बाद जांच में कई खामियां सामने आई हैं। बुधवार को खाद्य सुरक्षा और औषधि प्रशासन विभाग की टीम मेडिकल कॉलेज परिसर और प्रशासनिक भवन में संचालित कैंटीन की जांच करने पहुंची।
जांच में पता चला कि प्रशासनिक भवन में प्राचार्य के कार्यालय के पास संचालित कैंटीन अवैध है। इमरजेंसी के पास चल रही कैंटीन को स्नैक्स और चाय बेचने का लाइसेंस मिला था, जबकि कैंटीन संचालक पूड़ी, सब्जी, चना, समोसा और भर्ती मरीजों के लिए भोजन तक बनाकर देता था। खाद्य सुरक्षा विभाग ने समोसे का नमूना भी लिया।
फायर बिग्रेड की जांच में पता चला कि एनओसी नहीं ली गई है। व्यावसायिक रसोई गैस सिलिंडर उपयोग करने की जगह अधिकतर घरेलू गैस सिलिंडर उपयोग किया जा रहा था। खाद्य विभाग की ओर से दुकानदार को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस दिया गया है।
मेडिकल कॉलेज परिसर में दोपर करीब एक बजे खाद्य सुरक्षा और औषधि विभाग के साथ आपूर्ति विभाग और फायर बिग्रेड की टीम पहुंची। इमरजेंसी के पास संचालित चाय वाला के नाम से संचालित कैंटीन में स्नैक्स के अलावा कई तरह का खाद्य पदार्थ बिकता हुआ मिला।
लाइसेंस जांच करने पर पता चला कि सिफ सेनेक्स व चाय बेचने के लिए लाइसेंस बना है। नियम को दरकिनार कर दुकानदार खुले में धड़ल्ले से सामान बेच रहा था।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों को भोजन व जरूरत की खाद्य समाग्री भी रुपये लेकर उपलब्ध कराता था। दुकानदार में उसी टंकी का पानी का इस्तेमाल करता था, जहां शव मिला थ। प्लास्टिक की पन्नी में चाय दे रहा था।
इस पर खाद्य विभाग की टीम ने चेतावनी दी। इसके बाद टीम प्रशासनिक भवन में प्राचार्य कक्ष के पास संचालित कैंटीन पर पहुंची। जांच में पता चला कि कोई लाइसेंस नहीं है। उसे तत्काल प्रभाव से टीम ने सील कर दिया। इस कार्रवाई के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़ा हो गया है।