सलेमपुर। पं. जवाहर लाल कृषक इंटर कॉलेज के प्रबंधक शैलेंद्र कुमार सिंह ने डीएम को पत्र देकर पड़री गजराज गांव स्थित आराजी संख्या 34 (रकबा 0.081 हेक्टेयर) और आराजी संख्या 25 (रकबा 0.0400 हेक्टेयर) की भूमि को फर्जी तरीके से वरासत कर ग्राम पंचायत भवन के लिए बैनामा किए जाने का आरोप लगाया है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत में आरोप है कि मूल खातेदार की मृत्यु के बाद कोई वैध वारिस न होने के बावजूद एक महिला ने ग्राम प्रधान की मिलीभगत से खुद को मृतक की पत्नी दर्शाते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार कराए और राजस्व अभिलेखों में अपना नाम दर्ज करा लिया। इसके बाद उस भूमि का बैनामा कर दिया गया।
बताया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग 727-बी (नवलपुर-सिकंदरपुर) के निर्माण के दौरान इस भूमि का कुछ हिस्सा अधिग्रहित हुआ, जिसके एवज में लाखों रुपये का मुआवजा स्वीकृत हुआ। आरोप है कि आराजी संख्या 34 और 25 के मुआवजे तथा बैनामे के माध्यम से कुल 74 लाख रुपये से अधिक की धनराशि प्राप्त की गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि जमीन की वास्तविक कीमत से अधिक दर दर्शाकर भुगतान किया गया और चेक विवरण में पारदर्शिता नहीं बरती गई।
शिकायत पत्र के अनुसार 20 मई 2025 को पंचायत भवन निर्माण के नाम पर बैनामा किया गया और भुगतान संबंधित महिला के खाते में स्थानांतरित कर दिया गया, जबकि परिवार रजिस्टर में उसका नाम दर्ज नहीं है। सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) द्वारा भी नाम दर्ज न होने की सूचना दी गई है।
एक दिन पहले तहसीलदार अलका सिंह ने दोनों पक्षों को बुलाकर साक्ष्य प्रस्तुत करने को कहा। संबंधित महिला ने परिवार रजिस्टर, पति का मृत्यु प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए। वहीं, शैलेंद्र कुमार सिंह ने सभी दस्तावेजों को फर्जी बताते हुए पुनः जांच की मांग दोहराई।
मामले में तहसीलदार ने हल्का लेखपाल को वास्तविक स्थिति की जांच करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खंड विकास अधिकारी लार को भी जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है। तहसीलदार ने स्पष्ट किया कि जांच में दोषी पाए जाने पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी।
उधर, प्रधान प्रतिनिधि रामप्रताप ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि पंचायत भवन निर्माण और भूमि संबंधी सभी कार्य नियमानुसार एवं प्रशासनिक स्वीकृति के बाद किए गए हैं।