संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। एनएचएम के करीब 500 कर्मचारियों की हड़ताल से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं की रफ्तार थमने लगी है। करीब 200 आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद होने से मरीजों को सामान्य जांच और प्राथमिक उपचार के लिए सीएचसी और पीएचसी का रुख करना पड़ रहा है।
इन केंद्रों पर मरीजों का दबाव बढ़ गया है। कर्मचारियों ने इमरजेंसी सेवाओं को छोड़कर अन्य कार्यों का बहिष्कार किया है।
संयुक्त राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश के बैनर तले कर्मचारी समान काम के लिए समान वेतन, स्वास्थ्य बीमा समेत अन्य सुविधाओं की मांग को लेकर हड़ताल पर हैं। उनका कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें अपेक्षित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में एनएचएम के तहत करीब 1167 कर्मचारी विभिन्न पदों पर कार्यरत हैं। इनमें 216 सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) और 217 सहायक नर्सिंग मिडवाइफ (एएनएम) भी शामिल हैं। इनमें से करीब 500 कर्मचारियों के काम से अलग रहने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित स्वास्थ्य केंद्रों पर सेवाएं प्रभावित हुई हैं।
आयुष्मान आरोग्य मंदिर बंद होने से ग्रामीणों को सामान्य बीमारियों की जांच और प्राथमिक उपचार के लिए सीएचसी-पीएचसी जाना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों को राहत देने के लिए आपातकालीन सेवाएं चालू रखी गई हैं। कर्मचारियों का कहना है कि मांग पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। हड़ताल लंबी खिंचने पर स्वास्थ्य सेवाओं पर असर और बढ़ने की आशंका है। अब कर्मियों की मांगों पर समाधान और सामान्य स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली पर नजर है।