देवरिया/भटनी। होली के बाद महानगरों की ओर लौटने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। मुंबई और गुजरात रूट की ट्रेनों में पूरे मार्च माह तक सीटें फुल दिखा रही हैं, जिससे परदेसियों को अभी से वापसी टिकट की चिंता सताने लगी है। पहले आने और अब जाने की टिकट नहीं मिलने से यात्री टुकड़ों में यात्रा करने की योजना बनाने में जुटे है। वही टिकट की दिक्कतों को देख परदेसियों के परिजन में परेशान नजर आ रहे हैं।
होली का त्योहार परिवार के साथ मनाने घर आने वाले लोग वापसी के टिकट बनाने में जुट गए है। दिल्ली, पंजाब, उड़ीसा, कोलकाता जाने वाली ट्रेनों में जहां लंबा वेटिंग दिखा रहा है वही मुंबई और गुजरात की ट्रेनों में पूरे मार्च महीने में आरक्षण रिग्रेट होने से लोग परेशान हैं। रेलवे टिकट काउंटर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लंबी वेटिंग लिस्ट चल रही है। कई प्रमुख ट्रेनों में कन्फर्म टिकट मिलना मुश्किल हो गया है। यात्रियों का कहना है कि त्योहार के बाद काम पर लौटना जरूरी होता है, लेकिन टिकट न मिलने से परेशानी बढ़ रही है।
दिल्ली, मुंबई, गुजरात और पंजाब में काम करने वाले बड़ी संख्या में लोग देवरिया और आसपास के जिलों से आते-जाते हैं। ऐसे में वापसी के समय ट्रेनों में दबाव और बढ़ जाता है। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से अतिरिक्त स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग की है। खासकर पंजाब रूट की महत्वपूर्ण जनसेवा एक्सप्रेस को दोबारा चलाने की मांग उठ रही है, ताकि परदेसियों को राहत मिल सके। हालांकि होली को लेकर आने और जाने के लिए विभिन्न रूटों पर रेलवे स्पेशल ट्रेनें चलाई है, लेकिन लोगों की भीड़ के आगे यह नाकाफी है। ऐसे में परदेसी मुम्बई, गुजरात, दिल्ली और पंजाब रूट पर कुछ और विशेष ट्रेनें चलाने की मांग कर रहे हैं। स्टेशन अधीक्षक मनोज पांडेय ने बताया कि होली त्योहार को लेकर कुछ और ट्रेनें चलाने की योजना बनाई जा रही है।
बोले यात्री...
हर साल त्योहार और लगन के मौसम में ट्रेनों में जगह नहीं मिलती, फिर भी रेल प्रशासन इसे गंभीरता से नहीं लेता। मजबूरी में अब टुकड़ों में यात्रा की योजना बनानी पड़ रही है, लेकिन महिलाओं और बच्चों के साथ बार-बार ट्रेन बदलना आसान नहीं होता।
- भीम यादव, यात्री।
मुंबई, गुजरात और पंजाब रूट की ट्रेनों में सीटें फुल होने से होली मनाने घर आए लोगों की चिंता बढ़ गई है। समय पर ड्यूटी पहुंचने के लिए अब बस और अन्य विकल्प अपनाने की योजना बनानी पड़ रही है।
- अनुराग कुमार, यात्री।