ये जमीनें कौड़ीराम कस्बे के पास और गोरखपुर-बड़हलगंज रोड के किनारे हैं। वर्ष 2007 में में प्रशासन की ओर से कराए गए सर्वे रिपोर्ट में सामने आया था कि रानीपुर गांव में अराजी नंबर 22 क में .586 हेक्टेयर, 22 ख में .583 हेक्टेयर, 41 में .101 हेक्टेयर व 110 में .03 एकड़ जमीन सरकार बहादुर, कैंसर हिन्द नं. 1 यानी सरकार की भूमि है।
दस्तावेजों में सात लोगों का नाम अंकित है। जबकि किसी व्यक्ति को भूमिधरी अधिकार नहीं मिल सकता है। इस रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन एसडीएम रामशिरोमणि मौर्य ने सभी लोगों का नाम दस्तावेज से निरस्त करते हुए दाखिल-खारिज कर सरकार की जमीन अंकित करने का निर्देश दिया। साथ दोषी राजस्वकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा।
इस आदेश के खिलाफ कब्जेदारों ने कायिमी (अपील ) दाखिल किया। इसके बाद भी जमीनों का नामांतरण दूसरे के नाम होता रहा। प्रशासन की ओर से लापरवाही पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
वर्ष 2021 में तत्कालीन एसडीएम ने 2008 में हुए आदेश को निरस्त करते हुए कब्जेदारों के पक्ष में फैसला सुनाया। इसके खिलाफ शासकीय अधिवक्ता ने वाद दाखिल करते हुए अपील की। अब इस मामले में सुनवाई के बाद 27 अप्रैल 2026 एसडीएम बांसगांव का फैसला आया है, जिसमें उन्होंने 2011 के फैसले का निरस्त करते हुए 2008 के आदेश को बहाल कर दिया है।