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केस दर्ज होने तक आंदोलन करेंगे वकील

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केस दर्ज होने तक आंदोलन करेंगे वकील
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दीवानी कचहरी के गेट पर सभा और बैठक के बाद लिया गया निर्णय
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। पुलिस द्वारा अधिवक्ता की पिटाई के मामले में एसडीएम व कोतवाल पर कार्रवाई न होने अधिवक्ता गुस्से में हैं। सोमवार को दीवानी न्यायालय के मुख्य गेट पर अधिवक्ताओं ने सभा की। तय हुआ कि एसडीएम, कोतवाल सहित अन्य के खिलाफ केस दर्ज होने तक आंदोलन जारी रहेगा। इस दौरान बंदियों को लेकर कचहरी पहुंची पुलिस की गाड़ी को भी अधिवक्ताओं ने लौटा दिया। दोपहर बाद अधिवक्ता संघ भवन के सभागार में अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष सिंगासन गिरी की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें प्रशासनिक जांच रिपोर्ट को झूठा बताया गया। अधिवक्ताओं ने कहा कि प्रशासन अपनी कमियों को छिपाने के लिए ऐसा कर रहा है।
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रामजानकी मंदिर के सामने दुकानों की तोड़- फोड़ के मामले को लेकर एक दिसंबर की देर शाम कोतवाली पुलिस ने अधिवक्ता विष्णु जायसवाल को कोतवाली लाकर पिटाई कर दी। ऐसे अधिवक्ताओं का आरोप है। इसे लेकर वकीलों के विरोध के डीएम ने चार सदस्यीय जांच टीम गठित की। इसी दिन तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ एसपी ने कार्रवाई की, लेकिन बाद में पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता कर डीएम आशुतोष निरंजन एवं एसपी श्रीपति मिश्र ने पूरे मामले को गलत बता दिया। कहा कि जांच में अधिवक्ता की पिटाई का कोई प्रमाण एवं साक्ष्य नहीं मिला है। प्रशासन की यह कार्रवाई अधिवक्ताओं के गले नहीं उतर रही है। उनका कहना है कि जब घटना गलत थी तो तीन सिपाहियों के खिलाफ क्यों कार्रवाई की गई। प्रशासन अफसरों को क्यों बचा रहा है। कोतवाल जहां भी तैनात रहें है उनकी कार्यप्रणाली विवादों में रहीं है। बावजूद इसके अफसर संरक्षण देने में जुटे हैं। सोमवार को मुख्य गेट पर हुई सभा को संबोधित करते हुए सुभाष चंद्र राव, पूर्व अध्यक्ष बृज बांके तिवारी, ओमहरिहर मिश्र, सुरेंद्र त्रिपाठी, ललल्न मिश्रा, रामप्रसाद कुशवाहा, अरविंद साहनी, प्रकाश तिवारी निराला, सुयश सिंह, अनिल सिंह, संजय श्रीवास्तव, देवेंद्र सिंह , अभिषेक मिश्रा, संजय सिंह, शिव कुमार मणि, जटाशंकर सिंह, हरिद्र प्रताप श्रीवास्तव, आनंद राय, प्रबोध श्रीवास्तव, प्रेम नारायण मणि आदि ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा किया। कहां कि गोरखपुर में भी ऐसा ही होटल में हुई मारपीट की घटना को पुलिस ने सीसीटीवी के आधार पर फर्जी बताया था। बाद में सच्चाई सामने आने पर कलई खुल गई। वैसे ही यहां भी निष्पक्ष जांच हो तो पुलिस की असलियत सामने आ जाएगी।
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