गरीबों को कर्ज देकर लूटने का धंधा जोरों पर चल रहा है। नगर में सूदखोरी और ग्रामीण इलाकों में चिट फंड कंपनी काफी सक्रियता से काम कर रही है। सूदखोरी और कंपनी के कर्मचारी हर दिन कर्जदारों से जमकर वसूली कर रहे है। कर्ज से डूबे लोग शिकायतों में कार्रवाई नहीं होने पर चुप हो जा रहे है। जिले पर दो साल के भीतर करीब एक दर्जन चिट फंड कंपनी लोगों का रुपया लेकर फरार हो चुकी है। वहीं थाने से तहसील तक कई लोग सूदखोरी में अपना सब कुछ लुटा दिए।
नगर में रकम देकर व्याज वसूलने का धंधा जोरों पर चल रहा है। बडे़ पूंजीपति ठेले वालों से लेकर दुकानदारों को पांच से आठ प्रतिशत प्रति माह की दर से रुपये बांट रखे हैं। वह बकायदे शाम को लेकर कर्जदारों से ब्याज की रकम की वसूली करते हैं और मूलधन कर्जदार के पास पड़ा रहता है।
वहीं चिट फंड कंपनी वाले महिलाओं का समूह बना कर रुपये बांट रखे है। नगर में वर्तमान में दस महिलाओं का समूह सक्रिय है। एक पखवारे पर समूह वाले किसी सदस्य के घर बैठ कर कर्ज बांटना और सूद वसूलने का काम करते है। फलमंडी, मछली मंडी और मुख्य बाजार में सूदखोरी का धंधा करने वालों का जमावड़ा लगा है
जागरुकता के अभाव में लोग सूदखोर और चिट फंड कंपनी से कर्ज लेकर शिकार हो रहे हैं, हालांकि नगर से लेकर गांव तक शासन की ओर से लागू कई योजनाओं से लोन मिल रहा है। ईओ कमलेश कुमार शाही ने बताया कि नगरीय क्षेत्रों में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना से लोन लेकर लोग कारोबार कर रहे है। जिस पर कम व्याज भी लगता है।
वहीं एडीओ पंचायत ने बताया कि खंड विकास कार्यालय की तरफ से गांवों में महिलाओं का समूह बनाकर उन्हें स्वावलंबी बनाया जा रहा है। मनरेगा के तहत रोजगार से महिलाओं को जोड़ कर आय का स्रोत भी बढ़ रहा है। क्षेत्र के मनिहरपुर गांव में महिलाओं के समूह द्वारा तैयार किया हुआ पोषण आहार आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित हो रहा। ऐसे छोटे उद्योगों को शुरू करने के लिए शासन की ओर से कम ब्याज पर कई योजनाएं संचालित हो रही है।