19 शिक्षकों के भुगतान में लेखा अनुभाग ने दिखाई अतिरिक्त तेजी
अपना ही वेतन, एरियर व पेंशन पाने के लिए महीनों से कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं कई शिक्षक
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। दो अनुदानित स्कूलों में मनमानी कर 19 शिक्षकों को बैक डेट दिखाकर भर्ती करने और उनका भुगतान कराने के मामले में लेखा अनुभाग ने खूब तेजी दिखाई थी। तबादले के बाद जनपद में आए शिक्षक और निलंबन के बाद फिर बहाल होने वाले अपना एरियर और वेतन के लिए रोज कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं। संबंधित अधिकारी और यहां के कर्मचारी इन्हें रोज आश्वासन देकर टरका देते हैं।
एसटीएफ द्वारा 17 लोगों पर मुकदमा कराने के मामले में दो अनुदानित स्कूलों में 19 शिक्षकों का फर्जी तरीके से अनुमोदन पत्र तैयार कर नियुक्ति कराने और एरियर सहित अन्य भुगतान के मामले में अधिकारियों ने अतिरिक्त तेजी दिखाई है। एसटीएफ की जांच में भी यह बात साबित हो चुकी है।
गौरतलब है कि भुगतान में अति सक्रियता के चलते ही पिछले वर्षों में यहां तैैनात रहे एक बीएसए और एडी बेसिक निलंबित भी किए जा चुके हैं। जांच एजेंसी ने अनुदानित विद्यालयों में शिक्षक भर्ती फर्जीवाड़े में लेखा अनुभाग की कारगुजारियों को भी केंद्र में रखा हुआ है। यह सर्वविदित है कि लेखा के बाबुओं से लेकर चपरासी तक को चढ़ावा दिए बिना कोई कार्य करा लेना संभव नहीं है।
सामान्य कार्य के लिए ये आए शिक्षकों एवं संबंधितों को कई दिनों तक खूब दौड़ाते हैं। अधिकारी के अतिप्रिय दो बाबूओं की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। कई बार इनकी शिकायत शासन स्तर से की जा चुकी है। एक बाबू तो अपने पहुंच और प्रभाव के चलते तबादले के बाद भी यहीं जमा हुआ है। जिले में कुल 72 अनुदानित स्कूल हैं, इनमें से 69 स्कूलों के आठ सौ से अधिक शिक्षकों के वेतन मद में हर माह करोड़ों खर्च किए जाते हैं। वेतन भुगतान के लिए हर माह संबंधित शिक्षकों को दोनों बाबुओं के चक्कर लगाने पड़ते हैं। विभागीय मामला होने के चलते परिषदीय के शिक्षक भी इनकी शिकायत करने से डरते हैं।
लेखा अनुभाग में छा गया है सन्नाटा
बेसिक कार्यालय के लेखा अनुभाग में सन्नाटा पसरा हुआ है। पूरे दिन अनुदानित स्कूलों में कार्यरत एवं कभी स्कूल न जाने वाले शिक्षकों से गुलजार रहने वाला यह सेक्शन अब खाली नजर आने लगा है। प्रकरण के बाद यहां तैनात कर्मचारी भी कुछ बोलने से बच रहे हैं। बेवजह यहां डटे रहने वालों के चलते कार्यालय का काम भी प्रभावित होता रहता था। वेतन, एरियर, पेंशन सहित अन्य भुगतान के लिए आने वाले सेवानिवृत्त या कार्यरत शिक्षकों के काम नहीं होने से वह अधिकारियों व कर्मचारियों को कोसते हुए हर रोज नजर आते हैं। उनका आरोप भी होता है कि यहां अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों को बिना चढ़ावा दिए कोई काम नहीं हो सकता है।
लेखाधिकारी के एक सप्ताह पूर्व से न आने से कामकाज हो रहा प्रभावित
फर्जीवाड़े को लेकर लेखाधिकारी जगदीश श्रीवास्तव पर कोतवाली पुलिस ने केस दर्ज किया है। हालांकि वह केस दर्ज होने के चार दिन पहले से ही कार्यालय नहीं आ रहे थे। अंदेशा लगाया जा रहा है कि उन्हें अंदाजा लग गया था कि उनके खिलाफ कुछ कार्रवाई हो सकती है। विभागीय सूत्रों की माने तो वह केस के खिलाफ स्टे आर्डर लेने की कोशिश में हैं। उधर, उनके करीब एक सप्ताह से ही कार्यालय न आने से भुगतान से जुड़े कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में बेसिक कार्यालय की ओर से इसकी सूचना डीएम को दी जा चुकी है। कोशिश हो रही है कि किसी और को चार्ज देकर रुके कार्य को सामान्य बनाया जा सके।
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अधिकारी से लेकर शिक्षक व अन्य जिन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, एसटीएफ के साथ ही देवरिया कोतवाली पुलिस तलाश में लगी है। जो भी विवेचक होगा, वहीं इस पूरे मामले की जांच करेगा। अन्य फर्जी शिक्षक भी टीम के रडार पर हैं।
- एसपी सिंह, इंस्पेक्टर, एसटीएफ टीम गोरखपुर