खुखुंदू। बालेपुर मठिया में एक साल पहले घर में मिट्टी भरने के लिए खोदा गया गड्ढा बरसात में तालाब बन गया। खेत में खोदे गए गड्ढों को न तो भरा गया और ही वहां सुरक्षा के उपाय किए गए। बच्चे कई दिन से इस गड्ढे में नहा रहे थे मगर किसी का ध्यान नहीं गया। देर शाम खुखुंदू पुलिस ने गांव पहुंचकर हादसे की जानकारी ली और पंचनामा भरवाया।
बालेपुर मठिया निवासी जलालुद्दीन ने एक साल पहले निर्माणाधीन मकान में मिट्टी भरवाने के लिए खुद की भूमि में गड्ढा खोदवाया था। तबसे गड्ढा वैसे ही पड़ा था। इधर, बारिश के बाद जब गड्ढे में पानी भर गया तो आसपास के नट समुदाय के बच्चे उसमें नहाने जाने लगे।
जलालुद्दीन के घरवालों का कहना है कि बच्चों को उसमें नहाने से मना करते थे मगर वे मानते नहीं थे। रविवार की सुबह जब बच्चों का एक झुंड गड्ढे में नहाने पहुंचा तो एक महिला ने सबको डांटकर भगाया था। वह जब अपने घर के अंदर चली गई तो बच्चे फिर गड्ढे में नहाने लगे। उसी दौरान तौहिद और सहाबुद्दीन का पैर मिट्टी में धंस गया और दोनों की डूबने से मौत हो गई।
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कब्रिस्तान में शव पहुंचने के बाद पहुंची पुलिस और राजस्व टीम
गड्ढे में डूबने से दो बच्चों की मौत होने के बाद जब घरवाले शव कब्रिस्तान में दफनाने के लिए पहुंचे तब वहां पुलिस और राजस्व टीम पहुंची और पंचनामा भरवाया गया। आश्चर्य की बात यह रही कि इतने बड़े हादसे की जानकारी न तो पुलिस को हुई और न ही प्रशासन को, जबकि गांव की हर छोटी सी छोटी सूचना देने के लिए चौकीदार हैं। ग्राम प्रशासक की भी जिम्मेदारी होती है कि वे ऐसे मामलों में प्रशासन को अवगत कराएं। इसके अलावा राजस्व विभाग की तरफ से लेखपाल भी ऐसी घटनाओं की सूचना अपने वरिष्ठ अफसरों को देते हैं।
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कोट..
हादसे की जानकारी होते ही मौके पर लेखपाल को भेजा गया है। परिवार वालों को दैवीय आपदा के तहत आर्थिक सहायता प्रदान कराई जाएगी।
क्षितिज द्विवेदी, एसडीएम सलेमपुर