तरकुलवा। बंजरिया गांव में वर्ष 2003 में 60 लाख की लागत से पानी की टंकी बनाई गई थी लेकिन 22 साल बाद भी 15 हजार की आबादी की प्यास नहीं बुझा सकी। बंजरिया, शेखपुरा, पोखरभिंडा, बैकुंठपुर, पगरा, बिरती आदि गांवों के लोग आज भी दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। पथरदेवा विकास खंड में स्थित बंजरिया बाजार एक अत्यंत ही प्राचीन बाजार है। जहां निर्माणाधीन राजकीय आईटीआई कॉलेज के अलावा न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बड़ौदा यूपी बैंक, यूनियन बैंक, इफको खाद गोदाम सहित कई सरकारी और गैर सरकारी संस्थान संचालित हो रहे हैं।
यहां के लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए 2003 में पानी की टंकी का निर्माण कराया गया था। ताकि लोगों को शुद्ध पानी मिल सके। इसके लिए बिजली कनेक्शन लिया गया। एक अदद 25 केवी का ट्रांसफाॅर्मर लगाया गया, ऑपरेटर की तैनाती की गई लेकिन 22 साल बाद भी लोगों के घरों तक शुद्ध पानी नहीं पहुंचा। कार्यदायी संस्था ने जो पाइपलाइन बिछायी वह जगह-जगह लीकेज हो गई।टंकी से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं होने से लोगों को दूषित जल पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। इससे लोग टाइफाइड, डायरिया, हैजा, चेचक और केंसर जैसी घातक बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।लोगों ने विभागीय अधिकारियों से अधूरे कार्यों को पूरा कराकर शीघ्र जलापूर्ति शुरू कराने और टंकी का निर्माण करने वाली कार्यदायी संस्था के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।