बदायूं। गन्ने में रेड रॉट (लाल सड़न) की बीमारी लगने से किसानों को इस बार 90.72 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो गया। गन्ने में आई बीमारी ने बदायूं समेत पूरे प्रदेश की चीनी मिलों को नुकसान पहुंचाया है। अब चीनी मिल भी इस गन्ने को लेने में आनाकानी कर रही है।
जिले में इस साल 1877 हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की बोआई हुई है। इतनी ही हेक्टेयर खेती में पिछले साल 1,11,60,000 क्विंटल गन्ने की पैदावार हुई थी। इस बार फिर से किसानों ने गन्ने की बोआई की, लेकिन बरसात के दिनों में आई रेड राॅट बीमारी ने किसानों को भारी नुकसान दे दिया।
गन्ने की पैदावार में 20 फीसदी से भी ज्यादा गिरावट आई है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो इतने क्षेत्रफल में ही इस साल मात्र 86,40,000 क्विंटल गन्ने की पैदावार हुई है। 25,20,000 क्विंटल गन्ने की पैदावार कम हुई। 360 रुपये क्विंटल गन्ना सरकारी रेट बिक रहा है। इस हिसाब से गन्ने की कीमत यानी 90.72 करोड़ रुपये का नुकसान इस बार किसानों को हो गया।
जागरूकता के अभाव में किसानों को भारी नुकसान
पिछले कई सालों से किसान 0238 प्रजाति गन्ने की बोआई करते आ रहे हैं। पिछले तीन सालों से इस प्रजाति में बरसात के दिनों में रेड रॉट की बीमारी आ रही थी। ऐसे में पश्चिम के किसानों ने इस प्रजाति की बोआई या तो बंद कर दी या फिर कृषि वैज्ञानिकों से जानकारी कर बीमारी को आने से पहले ही रोक दिया। लेकिन बदायूं के जिम्मेदार अफसरों ने इस तरफ ध्यान नहीं दिया और किसानों को भारी नुकसान हो गया।
0238 प्रजाति के बजाए इन प्रजातियों की करें बोआई
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसानों को जानकारों ने तीन साल पहले ही सूचित कर दिया था कि 0238 प्रजाति में आने वाली बीमारी रुक नहीं पा रही है। ऐसे में दूसरी प्रजाति की बोआई की जाए। किसानों ने जानकारों की बात को माना तो वह भारी नुकसान से बच गए, लेकिन यहां के जिम्मेदार किसानों को जागरूक नहीं कर पाए। हालांकि इस बार हुए नुकसान के बाद जिला गन्ना अधिकारी ने किसानों से कहना शुरू कर दिया है कि अब 0238 प्रजाति गन्ने की बोआई न करें। इसके स्थान पर 13235, 15023, 16202 प्रजाति की बोआई करें।
रेड रॉट बीमारी के चलते पैदावार में कमी आई है। किसानों को बताया जा रहा है कि 0238 प्रजाति की बोआई न करें। पिछले कई सालों से इस प्रजाति में बीमारी आ रही है। किसानों को दूसरे प्रजाति का बीज इस बार दिया जा रहा है।
अशरफी लाल, जिला गन्ना अधिकारी