बरहज। तहसील कार्यालय में 2023 में संग्रह अनुसेवक के पद पर कूटरचित तरीके से नियुक्ति किए जाने का मामला सामने आया है। जिसमें कर्मचारी के मृत्यु के बाद उसके भतीजे को नौकरी दे दिया गया है। जांच में चार अधिकारी जांच के घेरे में हैं। डीएम ने दोषी कर्मियों और अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया है।
तहसील परिसर में कार्यरत छेदी यादव पुत्र घुरभारी की 2022 में मृत्यु हो गई थी। जिनके स्थान पर दत्तक पुत्र शैलेष यादव को पद पर नौकरी दे दिया गया है। जिस पर पूर्व सामयिक संग्रह अनुसेवक विनय कुमार ने प्रार्थना पत्र देकर शिकायत करते हुए संग्रह अनुसेवक पद पर कूटरचित कागजातों के आधार पर नियुक्ति करने और संलिप्त कर्मचारियों-अधिकारियों की भूमिका की जवाबदेही के लिए अनुरोध किया गया था।
बताया जा रहा है कि जिस पर डीएम के निर्देश पर त्रिस्तरीय समिति गठित कर जांच किया गया। 14 अगस्त 2025 को मुख्य राजस्व अधिकारी ने पत्रक जारी कर जांच रिपोर्ट प्रेषित किया है। जांच में 2022 में संग्रह अनुसेवक छेदी यादव की मृत्यु हो गई। जिसके पश्चात मृतक की पत्नी चंद्रावती देवी ने भतीजे को नौकरी दिलाने के लिए रजिस्टर्ड गोदनामा कर दिया। लोगों के अनुसार फर्जी तरीके से नियुक्ति मामले में तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर हरीशचंद्र, सीमा पांडेय, सीआरओ जलराजन चौधरी ने रिपोर्ट प्रेषित किया था।
नियुक्ति मामले में कागजों के हेरफेर में हलका लेखपाल रामकुमार, राजस्व निरीक्षक दिनेश उपाध्याय, सेवानिवृत्त पटल सहायक विनोद प्रताप बहादुर सिंह, नायब तहसीलदार रमेश चंद्र गुप्त, खिरसाखाड़ में तैनात पंचायत सचिव के दोषी पाये जाने की बात सामने आ रही है।
एसडीएम विपिन कुमार द्विवेदी ने बताया कि इस तरह का प्रकरण सामने आया है।