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19 ट्रेनें लेट, पांच का रूट बदला

Thu, 02 Oct 2014 05:30 AM IST
Deoria
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देवरिया। गोरखपुर के नंदानगर रेलवे क्रॉसिंग पर हुए ट्रेन हादसे के बाद रेल प्रशासन ने पांच ट्रेनों का रूट बदलकर संचालन कराया। हादसे के चलते 19 ट्रेनें विलंब हुईं। 12 घंटे बाद किसी तरह यातायात शुरू हुआ। ट्रेनों के विलंब होने से परेशान यात्री प्रतीक्षा में खड़े रहे। उन्हें पांच से लेकर सात घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
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मंगलवार की रात गोरखपुर के नंदानगर रेलवे क्रॉसिंग पर डाउन बरौनी एक्सप्रेस और अप कृषक एक्सप्रेस में टक्कर हो गई। हादसे के बाद गोरखपुर-छपरा रेलखंड पर ट्रेनों का संचालन प्रभावित हो गया। रेल प्रशासन ने डाउन बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस, अप बरौनी-लखनऊ, डाउन ग्वालियर-बरौनी मेल, डाउन अवध-असम एक्सप्रेस, डाउन जनसेवा एक्सप्रेस को कप्तानगंज-थावे-सिवान के रास्ते चलाया। डाउन दादर एक्सप्रेस, डाउन आम्रपाली एक्सप्रेस, डाउन हाबड़ा एक्सप्रेस, डाउन गोदान एक्सप्रेस, डाउन वैशाली एक्सप्रेस, डाउन छपरा पैसेंजर, डाउन कृषक एक्सप्रेस, डाउन मौर्य एक्सप्रेस देरी से चली। इसी तरह गोरखपुर की ओर जाने वाली चौरीचौरा एक्सप्रेस, पैसेंजर, पैसेंजर, पूर्वांचल एक्सप्रेस, बापूधाम सुपरफास्ट, मंडुवाडीह इंटरसिटी, छपरा इंटरसिटी, आम्रपाली, छपरा-मथुरा एक्सप्रेस पांच से सात घंटे की देरी से देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर पहुंची। इसके अतिरिक्त मंगलवार की रात को गोरखपुर की ओर जाने वाली अवध-असम एक्सप्रेस और न्यू जलपाई गुड़ी-नई दिल्ली साप्ताहिक सुपरफास्ट एक्सप्रेस को देवरिया से चौरीचौरा स्टेशनाें के बीच रोका गया। ट्रेनों के रूट बदलने और विलंब से चलने से यात्रियों को काफी दिक्कत हुई। दोपहर बाद यातायात सामान्य हो सका।
...तो बच जाते इस भयावहता से
अममून लखनऊ से आने वाले देवरिया के लोग गोरखपुर उतरकर चौरीचौरा एक्सप्रेस पकड़ते हैं। मंगलवार की रात भी इंटरसिटी एक्सप्रेस 9:55 पर गोरखपुर पहुंची। लेकिन चौरीचौरा एक्सप्रेस के बारे में वह लोग पता करते इसी बीच एनाउंस हुआ कि देवरिया की तरफ जाने वाली लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस प्लेटफार्म नंबर सात से जाएगी। चौरीचौरा एक्सप्रेस की बजाय देवरिया के ज्यादातर लोग घर पहुंचने की चाहत में लखनऊ-बरौनी में सवार हो गए। हमेशा की तरह जनरल बोगी में भीड़ थी इसलिए लोग स्लीपर कोच में सवार हो गए। कैंट स्टेशन से ट्रेन जैसे ही आगे बढ़ी वह जोरदार हादसे का शिकार हो गई। हादसे में सकुशल बच निकले लोग इसके बाद अफसोस करने लगे की काश वह चौरीचौरा एक्सप्रेस ही पकड़ते तो इस हादसे की भयावहता देखने से बच जाते।
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-आशिफ अली।
गड्ढे की तरफ भागने लगी ट्रेन
कैंट स्टेशन से चलने के बाद ट्रेन रफ्तार बढ़ाने की कोशिश में थी। बरौनी-लखनऊ ट्रेन के डिब्बे में हम लोग भी खुद को व्यवस्थित कर रहे थे कि अचानक बहुत जोर का झटका लगा। आवाज इतनी तेज थी जैसे लगा कि कोई बहुत भारी चीज टकराई है। अब तक ऐसा लगने लगा था कि जैसे ट्रेन पटरी से उतरकर गड्ढे की तरफ भागने लगी हो। ऊपर की सीट पर बैठे कुछ यात्री नीचे गिर गए जबकि कुछ गिरते-गिरते लटक गए। मैं जैसे-तैसे डिब्बे से बाहर आया तो पटरी के किनारे सैकड़ों लोग खड़े थे। डिब्बे में लगी पानी की टंकी फट गई थी जिससे बोगी में पानी भरने लगा। दूसरी तरफ जाकर देखा तो तीन डिब्बे पलटे थे। रात दस बजे मैंने घर पर फोन कर दो घंटे बाद पहुंचने की जानकारी दी। साढ़े 11 बजे मैंने दोबारा फोन कर ट्रेन दुर्घटना की जानकारी दी।
- सभासद गौहर अली।
पानी से भरने लगा ट्रेन का डिब्बा
कारोबार के सिलसिले में लखनऊ गया था। वहां अपना काम निपटाने के बाद मेडिकल की तैयारी करने वाले बेटे अतुल ने भी त्योहार में साथ ही घर चलने का प्रोग्राम बना लिया। इंटरसिटी से गोरखपुर उतरने के बाद लखनऊ बरौनी एक्सप्रेस से ही हम लोग घर के लिए चल दिए। जिस डिब्बे में हम लोग बैठे थे उसके दो आगे वाले दो डिब्बों में ही इंजन की जबरदस्त टक्कर हुई थी। दो डिब्बे पूरी तरह से पलट गए थे। मैंने बेटे को संभालने के बाद खुद को संभाला। गनीमत थी कि तेज झटका लगने के बावजूद हमें ज्यादा चोट नहीं लगी थी। तब तक डिब्बे में ऊपर से न जाने कहां से पानी गिरने लगा। सभी जान बचाने की कोशिश में लगे थे। एक बोगी बिजली के खंभे से बिल्कुल करीब थी। गनीमत रही कि बोगी उससे सटी नहीं थी।
- व्यापारी प्रमोद गुप्ता, मालवीय रोड।
चार माह में उजड़ गई ममता की दुनिया
कंचनपुर। प्रदीप राव ने जिंदगी का नया सफर ममता के साथ चार माह पहले ही शुरू किया था। एक बार विदेश से कमाकर लौटे थे और दूसरी बार जाने की तैयारी कर रहे थे। उसी सिलसिले में वह मुंबई से लौट रहे थे। घर पर ममता अपने पति के आने की बाट जोह रही थी। तभी गोरखपुर के नंदानगर में ट्रेन हादसे की खबर आई और उसके बाद पति के साथ अनहोनी की सूचना मिली। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि कुदरत ने उसके साथ इतना बड़ा धोखा किया है।
तरकुलवा, कैथवलिया का प्रदीप उर्फ पिंटू (25) की उम्र में ही परिवार की जिम्मेदारियों को बखूबी समझता था। दो वर्ष पूर्व वह सऊदी अरब कमाने गया था। पिता ने उसकी शादी तय की तो वह मई में विदेश से घर आ गया। कुशीनगर के रामकोला के अंजही गांव निवासी लालजी राव की बेटी ममता के साथ छह जून को उसने सात फेरे लिए। चार माह तक पत्नी और अपने परिवार के साथ खुशी-खुशी रहा। वह दुबारा विदेश जाने की तैयारी करने लगा। इसी सिलसिले में वह दस दिन पूर्व अपने भतीजे मिथिलेश राव के साथ मुंबई गया था। मेडिकल कराने के बाद पासपोर्ट मुंबई में जमाकर वह घर वापस आ रहा था। मुंबई से गोरखपुर पहुंचने पर उसने पत्नी ममता से कहा कि दो घंटे बाद किसी को देवरिया स्टेशन भेज दो, वह लखनऊ-बरौनी से आ रहा है। उसके बाद उसके आने का ममता इंतजार कर रही थी। प्रदीप का छोटा भाई बलवंत भी बाइक से आने की बाट जोह रहा था। तभी ट्रेन हादसेे की सूचना भतीजे ने दी। हादसे की सूचना मिलते ही परिवारवालों को अनहोनी की आशंका हुई। रात करीब डेढ़ बजे प्रदीप की मौत की जानकारी मिली तो परिवार में कोहराम मच गया।
त्योहार मनाने की हसरतें रह गईं अधूरी
कंचनपुर। शत्रुघ्न के घर की माली हालत अच्छी नहीं थी। सो इंटर के बाद उसकी पढ़ाई छूट गई। सालभर पहले रोजगार की तलाश में उसने घर छोड़ दिया। गुजरात के जामनगर में उसे बेल्डर का काम मिल गया। दशहरा और दीपावली का त्योहार नजदीक आया तो परिवार के साथ खुशियां मनाने की हसरतें लेकर वह घर के लिए चला। फोन पर घरवालों से बात के दौरान उसने कई अधूरे कामों को पूरे करने का भरोसा दिलाया था। मगर इस हादसे ने न केवल शत्रुघभन की जिंदगी छीन ली बल्कि परिवार का सहारा भी छीन लिया।
तरकुलवा, नरहपटटी के गोपीचंद गुप्ता को जब बेटे शत्रुघ्नकी मौत की खबर मिली तो बदहवास हो गए। मां मालती इस कदर सदमे में आईं कि वह बार-बार बेहोश जा रही थीं। घर के हर शख्स की आंखें आंसुओं से भरी थी। सिर्फ सिसकियों से ही माहौल गूंज रहा था। चाचा रामायण गुप्ता ने आंखों में आंसू लेकर परिवार की दास्तां बयां की तो सबके आंखों में आंसू भर आए। उन्होंने बताया कि उनके भाई गोपीचंद के चार बेटाें में शत्रुघ्न दूसरे नंबर का था। वह परिवार की गाड़ी खींचने में पिता की मदद कर रहा था। पिछले वर्ष वह गुजरात के जामनगर शहर में जाकर बेल्डर का काम करने लगा। परिवार के साथ दशहरा और दीपावली मनाने के लिए वह गुजरात से मंगलवार की देर रात गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर पहुंचा। वहां से घर आने के लिए लखनऊ-बरौनी ट्रेन में सवार हुआ। पर उसे क्या पता था कि जिस उमंग और उत्साह को लेकर वह घर आ रहा है। वह चंद मिनटों में ही दूर हो जाएगी। उसने गोरखपुर से घरवालों को फोनकर कुछ घंटे में पहुंचने की सूचना दी थी। गोरखपुर के नंदानगर में रेल हादसे में जान चली गई।
ट्र्रेन के इंतजार में परेशान रहे यात्री
देवरिया। गोरखपुर में हुए रेल हादसे के बाद यात्रियों को काफी दिक्कत झेलनी पड़ी। देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन का इंतजार कर रहे यात्रियों ने अमर उजाला से अपनी पीड़ा साझा की।
स्टेशन आने पर हादसे की हुई जानकारी
हेतीमपुर के अवरही गांव निवासी शब्बीर अहमद के परिवार के बच्चे लखनऊ में रहकर पढ़ते हैं। कहते हैं कि बच्चों को सामान पहुंचाना था। सामान लेकर सुबह छह बजे देवरिया सदर रेलवे स्टेशन पर छपरा-मथुरा एक्सप्रेस पकड़ने के लिए आया। यहां आने के बाद हादसे का पता चला। हरहाल में लखनऊ जाना है, इसलिए ट्रेन का इंतजार कर रहे हैं।
दिक्कतों का करना पड़ा सामना
गोरखपुर के मानीराम के रहने वाले नागेंद्र कुमार सिंह अपनी बहन और भांजे को लेकर वाराणसी से आ रहे थे। उनका कहना था कि भटनी तक तो मंडुवाडीह इंटरसिटी एक्सप्रेस समय से आई। भटनी में इसे काफी देर तक रोक दिया गया। पूछने पर पता चला कि गोरखपुर में रेल हादसा हो गया है। किसी तरह देवरिया पहुंची है। पता नहीं गोरखपुर कब पहुंचाएगी।
छह घंटे से कर रहे इंतजार
शहर के रामनाथ देवरिया मोहल्ला के रहने वाले अजय सिंह का लखनऊ में भी मकान है। परिवार के कुछ सदस्य वहां भी रहते हैं। अजय उनसे मिलने के लिए जा रहे थे। कहते हैं कि सुबह छपरा-मथुरा एक्सप्रेस पकड़ने के लिए स्टेशन पर आया। यहां आने के बाद रेल हादसे की जानकारी हुई है। लखनऊ जाना जरूरी है। छह घंटे से स्टेशन पर इंतजार कर रहा हूं।
काश! कार्यक्रम कर देते रद
मऊ के रहने वाले संजय कुमार सिंह की बहन आम्रपाली एक्सप्रेस से कटिहार से आ रहीं थी। उनको घर ले जाने के लिए संजय इंटरसिटी एक्सप्रेस से देवरिया आए थे। उनका कहना था कि मऊ से ही देवरिया पहुंचने में काफी दिक्कत हुई है। फिर भी बैठकर आम्रपाली के आने का इंतजार कर रहे हैं। पहले जानते कि इस तरह की दिक्कत होगी तो कार्यक्रम रद कर देते।
नंदानगर ट्रेन हादसे का शिकार हुआ इंजीनियरिंग का छात्र
मदनपुर। नंदानगर के ट्रेन हादसे में दुबौली गांव के इंजीनियरिंग के एक छात्र की जान चली गई। वह बाबू बनारसीदास टेक्निकल इंस्टीट्यूट लखनऊ में बीटेक प्रथम वर्ष का छात्र था। बीटेक के छात्र अमन दुबे को गोरखपुर रेलवे स्टेशन से मौत खीचकर लखनऊ बरौनी एक्सप्रेस मेल गई। वह लखनऊ से गोरखपुर उतरने के बाद देवरिया पहुंचने के लिए चौरीचौरा एक्सप्रेस का टिकट खरीद लिया था। चौरीचौरा एक्सप्रेस आने के पहले बरौनी एक्सप्रेस स्टेशन पर खड़ी हो गई, अमन को जल्दी पहुंचने के लिए मौत ने बरौनी एक्सप्रेस में सफर करा दिया। सफर शुरू होने के तीन मिनट बाद ही वह मौत के मुंह में चला गया।
तीन भाइयों में सबसे बड़े अमन दुबे (18) वर्ष की मौत से उसके माता-पिता का बेटे को इंजीनियर बनाने का सपना चकनाचूर हो गया। होनहार छात्र की दर्दनाक मौत से पूरे गांव में मातम पसरा है। वह दशहरे की छुट्टी में गांव आ रहा था। उसके पिता संजय बैंकाक में हैं। मां अनीता देवरिया के उमानगर में स्थित अपने मकान पर बेटे का आना जानकर रात को जागकर उसकी राह ताक रही थी। देर रात जब बेटे की मौत की खबर आई तो मां को सांप सूंघ गया। अमन लखनऊ से किसी ट्रेन से रात 10 बजे गोरखपुर रेलवे स्टेशन पहुंचा। अंतिम बार उसकी बात उसके मामा मंटू से हुई। बताया कि वह गोरखपुर पहुंच चुका है। चौरीचौरा एक्सप्रेस का टिकट लेकर चाय पी रहा है। रात 12 बजे तक चौरीचौरा एक्सप्रेस से देवरिया पहुंचेगा। मामा से बात होने के बाद उसकी मां अनिता बेटे का इंतजार करने लगी। रात को 12 बजे तक जब अमन नहीं पहुंचा तो उसकी मां ने उसके मोबाइल पर फोन किया। लेकिन मोबाइल नहीं उठा। बेटे के पहुंचने मे ंदेर होने से मां की चिंता बढ़ती गई। समय काटने की नियत से टीवी खोला तो ट्रेन हादसे की खबर देख परेशान हो गई। रात्रि एक बजे के लगभग हेल्प नंबर से उसके मौत की खबर मिली तो पूरे घर मे ंकोहराम मच गया। ट्रेन दुर्घटना के दौरान सबसे पहले अमन के मौत की खबर आई।
डॅाफ्टमैन की मौत से स्तब्ध थे सहकर्मी
देवरिया। दो दिन पूर्व अपने रिश्तेदार के साथ निजी काम से लखनऊ गए नलकूप विभाग में ड्रॅाफ्टमैन राम विलास की रेल हादसे में मौत से सब स्तब्ध हैं। अपने मिलनसार और सरल स्वभाव से वह सबके प्रिय थे। गांव में मौत की खबर मिलने पर घरवालों के रोने बिलखने से माहौल गमगीन हो गया।
खुखुंदू, भलुअनी दुबे के राम विलास जिला मुख्यालय पर नलकूप विभाग में डॉफ्टमैन पद पर कार्यरत थे। 29 सितंबर को वह एक दिन की छुट्टी लेकर अपने निजी काम से लखनऊ गए थे। उनके साथ रिश्तेदार राम सेवक भी गए थे। परिवारवालों के अनुसार, वह मंगलवार को लखनऊ से घर लौट रहे थे। गोरखपुर पहुंचकर राम विलास ने अपनी बड़ी बेटी वंदना से मोबाइल पर बात की। उसने देर रात तक घर पहुंचने का भरोसा दिलाया। साथ ही भोजन पकाकर रखने को कहा। दोनों लखनऊ-बरौनी एक्सप्रेस ट्रेन से घर के लिए चले। अभी गोरखपुर के नंदानगर के सामने पहुंचे थे तभी रेल हादसा हो गया। घटना के बाद कर्मी का पता नहीं चल रहा था। रिश्तेदार राम सेवक घायल हो गया और उसने इसकी सूचना कर्मी के घरवालों को दी। रातभर लोग राम विलास को खोजते रहे। बुधवार की सुबह नौ बजे राम विलास के शव की शिनाख्त मेडिकल कॉलेज में हुई। मौत की सूचना मिलते ही भटवलिया किराए के मकान में रह रहीं पत्नी दुलारी देवी, बेटा चंदन, बेटी वंदना और अर्चना रोने बिलखने लगे। बड़ा बेटा पंकज गोरखपुर से घटनास्थल को रवाना हो गया। बाद में सभी गंाव को रवाना हो गए। गांव में माहौल गमगीन था। वहीं ऑफिस में वरिष्ठ रामनाथ, रामनरेश श्रीनिवास गुप्ता उदास भाव से बोले, राम विलास काम के प्रति समर्पित व्यक्ति थे। रात 12 बजे यदि एक्सियन बुलाते थे वह दौड़े चले आते थे। सबसे अच्छा व्यवहार करते थे। कभी किसी से अप्रिय नहीं बोले।
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