सलेमपुर। नेपाल और उत्तराखंड में हुई बारिश के बाद यूपी के बैराजों से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है। इससे लार विकास खंड के तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बुधवार की शाम छोटी गंडक नदी से गढ़वा गांव के सामने तेजी से पानी का रिसाव हो रहा है। यहां बांध कटा तो 34 तटवर्ती गांवों के जलमग्न होने की आशंका रहेगी। देर शाम तक पानी का रिसाव बंद नहीं हुआ था।
शाम चार बजे गढ़वा गांव वालों ने देखा कि मंदिर के समीप छोटी गंडक नदी के बंधे से पानी का तेजी से रिसाव हो रहा है। पानी बंद करने के लिए गांव वाले खुद प्रयास करने लगे और इसकी सूचना लोगों ने जिले के अधिकारियों को दी। सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार और लार पुलिस बंधे पर पहुंच गई। कुछ देर बाद पहुंचे बाढ़ खंड के ठेकेदार बंधे की मरम्मत में जुट गए। देर शाम तक बंधे पर गोरखपुर बाढ़ खंड के दो के जेई भी पहुंच गए। पानी के रिसाव होने से रोपन छपरा, रतनपुरा, पटनेजी, गौरा, गढ़वा, मेहरौना समेत कई गांव के लोगों के होश उड़ गए हैं। प्रशासन के काफी प्रयास के बाद भी देर शाम तक बंधे से हो रहे पानी का रिसाव बंद नहीं हो सका था। पानी के बंधों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए बाढ़ चौकी मेहरौनाघाट, चनुकी घाट, पिंडी को 24 घंटों के लिए अलर्ट कर दिया गया है। देर शाम तक बंधे पर नायब तहसीलदार, इंस्पेक्टर लार और बाढ़ खंड के कर्मचारी जमे रहे। इस बाबत नायब तहसीलदार राजाराम विश्वकर्मा ने बताया कि बंधे से हो रहा रिसाव बभी बंद नहीं हुआ है। बाढ़ को मध्य नजर रखते हुए सभी बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया गया है।
बढ़ रहा घाघरा, राप्ती का जलस्तर
बरहज। घाघरा और राप्ती नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी है। बाढ़ के पानी से मैदानी इलाकों में फसलें डूब गई हैं। घाघरा खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर पहुंच गई है। नदी पार के गांव परसिया देवार के दसरसरिया बंधे से ओवरफ्लो कर पानी उत्तर की ओर प्रवाहित हो रहा है। नुरुल्लाहपुर बंधे पर दबाव बनाए हुए है। कपरवार, मेहियवां में बाढ़ का पानी रामजानकी मार्ग के समीप पहुंच गया है।
थानाघाट पर बने मापक के अनुसार बुधवार को घाघरा खतरे के निशान 66.50 मीटर से ऊपर 67.95 मीटर पर प्रवाहित हो रही है। नदी खतरे के निशान से 95 सेंटीमीटर ऊपर है। 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 15 सेंटीमीटर की वृद्धि मापी गई है। वहीं राप्ती नदी के जलस्तर में भी वृद्धि जारी है। दोनों नदियों के बाढ़ का पानी मैदानी क्षेत्रों में तेजी से फै ल रहा है। इससे फसलें डूब गई हैं। सबसे मुसीबत में परसिया कूरह गांव के लोग हैं। अब यह गांव अतीत का हिस्सा बनने को हैं। बाढ़ का पानी नदी पार के परसिया देवार के दसरसरिया बंधे से ओवरफ्लो कर उत्तर की ओर प्रवाहित हो रहा है। बरमहवां, टुटहवा बंधे के पास भी बाढ़ का पानी दबाव बनाए हुए है। विशुनपुर देवार के नुरुल्लाहपुर बंधे के पास भी बाढ़ का पानी दबाव बनाए हुए है। विशुनपुर देवार के सभी टोले बाढ़ के पानी से घिर हुए हैं। भदिला प्रथम गांव बाढ़ के पानी से पूरी तरह घिर चुका है। सुरक्षा को देखते हुए यहां के स्कूल बंद कर दिए गए हैं। बाढ़ का पानी मेहियवां में रामजानकी मार्ग के बचाव के लिए बने ठोकरों से टकरा रहा है।
अतीत का हिस्सा बनने को है परसिया कूरह
बरहज। घाघरा नदी की कटान से सात वर्षों में पांच सौ वर्ष पुराना गांव अब अतीत का हिस्सा बनने को है। इन वर्षों में संपन्नता की पहचान रखने वाले इस गांव में बुधवार को बचे सभी घरों पर हथौड़े चलने लगे हैं। लोग अब इस गांव से आखिरी विदाई लेने को मजबूर हो गए हैं। नदी के कटान से इस साल अब तक 50 घर विलीन हो चुके हैं। बेबसी और मजबूरी का मंजर यहां के लोग शायद कभी न भूल पाएं। अपने हाथों से घरों को तोड़कर इन्हें नई राह की ओर जाते देख लोग द्रवित हुए, लेकिन शासन और प्रशासन स्तर पर इनके लिए कुछ भी नहीं किया गया।
अपनी माटी से जुदा होने का दर्द क्या होता है। इसे देखना हो तो परसिया कूरह के लोगों को जरूर देखें। अब यह गांव संगम की गोद में समाने वाला है। बुधवार को इस गांव के बचे शेष एक दर्जन घरों पर भी हथौडे़ चलने लगे। अगले दो-तीन दिनों में यहां संभव है कुछ भी न रहे। लोग घरों के सामान सुरक्षित स्थान पर ले जाने में जुटे हैं। गांव के श्याम बिहारी मिश्र, कृष्णदेव मिश्र, राकेश श्रीवास्तव, रविंद्र यादव बताते हैं कि अब गांव कुछ ही दिनों का मेहमान है। सभी बचे घर तोड़े जा रहे हैं। न जाने नदी कब अपनी आगोश में ले ले। इस गांव का इतिहास 500 वर्षों का है। यह गांव अमर शहीद विश्वनाथ मिश्र के नाम से भी जाना जाता है। गांव में कुल 469 घर थे। करीब 34,00 आबादी थी। वर्ष 2007 से कटान शुरू हुआ तो कभी थमने का नाम नहीं लिया। एक एक कर आलीशान मकान और झोपड़ियां नदी में समाहित हो गए। इस वर्ष गांव में 60 घर थे। जून माह से नदी ने कटान शुरू की तो करीब 50 घर विलीन हो गए। गांव के लोगों को मलाल है कि उनके आबाद गांव को बचाने के लिए कोई भी प्रयास नहीं हुआ।
इनके बचे घरों पर चल रहा हथौड़ा
बरहज। कटान प्रभावित गांव परसिया कूरह में बचे आखिरी घरों को तोड़ा जा रहा है। गांव के शकील मियां, कमलेश सिंह, छठ्ठू सिंह, यासीन, व्यास मिश्र, राघवेंद्र मिश्र, छटकुन्नी सिंह, आशीष सिंह, रामानंद सिंह, उपेंद्र नाथ पांडेय, श्याम बिहारी मिश्र, पिंटू मिश्र, दयानंद मिश्र, कैलाश नाथ श्रीवास्तव के घरों को तोड़ा जा रहा है। इनके घरों के बाद गांव में कुछ भी नहीं बचेगा। जबकि जयकुमार सिंह, मैनुद्दीन, शमशुद्दीन, नेक मोहम्मद, फुल मोहम्मद के घर मंगलवार की रात नदी में विलीन हो गए हैं।
कैसे तंदुरुस्त रहेंगे बांध
रुद्रपुर। गोर्रा और राप्ती बेसिन परियोजनाओं के शासन में वर्षों से लटके रहने से बंधों की हालत दिन-प्रतिदिन जर्जर होती जा रही है। रुद्रपुर में संवेदनशील स्थानों पर कटाव निरोधी परियोजना का 400 करोड़ रुपये शासन में चार वर्ष से अटका है। वहीं 1258 लाख रुपये की परियोजना का धन के अभाव में 50 फीसदी काम नहीं हो पाया है।
सिंचाई विभाग के एसडीओ जगधारी राम ने कहा कि भुसउल-पिड़रा तटबंध के ग्राम पिडरी के पास कटाव निरोधक कार्य और पचलड़ी तटबंध के ग्राम सुल्तानी और ईश्वरपुरा के पास कटाव निरोधक कार्य को 447.66 लाख की परियोजना सन 2011 में शासन को भेजी गई। परियोजना को टीएसी से स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन राज्य सेक्टर और नाबार्ड से परियोजना पर आपत्ति लगा पर वापस कर दिया। सिंचाई विभाग आपत्ति को ठीक कर पुन: फाइल राज्य सेक्टर को भेज दी है। उन्होंने बताया कि भुसउल-पिड़रा बांध पर किलोमीटर 0.850 से 1.300 पर कार्य पूर्ण कर लिया गया है। पांडेय मांझा जोगिया और नगवा छपरा बांध पर भी काम पूरा हो चुका है। लेकिन पिड़रा-करनपुर तटबंध और पलिया छपरा तटबंध पर धन के अभाव में काम नहीं हो पाया है। इन पांचों कटाव स्थलों पर 1258.70 लाख की परियोजना स्वीकृत है। धन के अभाव में 50 फीसदी काम बाकी है। उन्होंने कहा कि लंबित परियोजनाओं के धन आवंटन को शासन में प्रयास जारी है। इस बाबत विधायक अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि सभी परियोजनाओं का केंद्रीय अंशदान आहरित करा दिया गया है। राज्य के अंशदान के लिए शासन स्तर पर प्रयास चल रहा है। हर परियोजना का 75 फीसदी धन पूर्ववर्ती केंद्र की यूपीए सरकार ने दिया है।
कटान रोकने का उपाय करे प्रशासन
देवरिया। भटनी क्षेत्र के तेनुआ गांव में बुधवार को भूमि बचाओ किसान संघर्ष समिति की बैठक हुई। इसमें छोटी गंडक नदी से हो रहे कटान को रोकने के लिए प्रशासन की ओर से कोई उपाय नहीं करने पर नाराजगी जताई गई। किसानों ने डीएम को पत्र भेजकर प्रोजेक्ट बनाने की मांग की।
अध्यक्ष त्रिगुणानंद मिश्र ने कहा कि भटनी नगर से सटे जिगिना मिश्र और तेनुआ गांव के सामने कटान लंबे समय से हो रहा है। खेती योग्य जमीन नदी में विलीन हो रही है। कई किसान इसके चलते भूमिहीन हो गए। नदी के उत्तर तरफ बंधा होने से नदी आबादी की तरफ अपना रुख कर रही है। यदि सिंचाई विभाग कटान को रोकने के लिए उचित प्रबंध नहीं करता है तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं किसानों के बीच पहुंचे भाजपा नेता कमलेश शुक्ल ने कटान रोकने के लिए केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र से सहयोग का आश्वासन दिया। किसानों ने बताया कि केंद्रीय मंत्री से वे मिलकर कटान से अवगत करा चुके हैं। किसानों ने प्रशासन को चेताया कि यदि कटान रोकने का प्रबंध नहीं किया गया तो वे सत्याग्रह करेंगे। इस मौके पर कृष्णदेव मिश्र, जयप्रकाश सिंह, सुरेश सिंह, बलिस्टर, रामाज्ञा कुशवाहा, सोनू आदि मौजूद रहे।
मंद पड़ी रफ्तार पर खतरा बरकरार
24 घंटा में 10 सेमी बढ़ा राप्ती और गोर्रा का जलस्तर
नारायनपुर और बहोरादलपतपुर में मकानों में घुसा पानी
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रुद्रपुर। राप्ती और गोर्रा नदी के जलस्तर में पांचवें दिन भी बढ़ोत्तरी जारी रही। हालांकि, नदियों के बढ़ने का रफ्तार विगत दिनों की तुलना में कम है। राप्ती और गोर्रा का जलस्तर 24 घंटे में सिर्फ 10 सेंटीमीटर ही बढ़ा है। बुधवार को गोर्रा नदी का जलस्तर 70.20 मीटर पर पहुंच गया था। जो लाल निशान 70.50 मीटर से 30 सेंटीमीटर नीचे है। वहीं राप्ती नदी 69.65 मीटर पर बह रही है।
नदियों के जलस्तर में मामूली वृद्धि से बाढ़ खंड के अधिकारी राहत महसूस कर रहे हैं। पिड़रा-भुसउल बांध पर पिड़री गांव के पास कटान जारी है। सिंचाई विभाग कटान पर काबू पा लेने का दावा कर रहा है। लेकिन गांव वालों के अनुसार कटान का खतरा अभी टला नहीं है। गोर्रा नदी के जलस्तर में व्यापक वृद्धि से नरायनपुर और बहोरादलपतपुर गांव में मकान नदी की जद में आ गए हैं। यहां कई मकानों में पानी घुस गया है। मकान कटने के खतरे से नदी के किनारे के घर खाली कर दिए गए हैं। पिछले वर्ष नारायनपुर में बेचू सिंह, मूरत सिंह, रामाज्ञा, राजकुमार, जयनारायण सिंह, चंद्रभान, शंकर, नन्हकू और बहोरादलपतपुर के रमेश मिश्र के तीन पक्के मकान कट कर नदी में विलीन हो चुके हैं। इस वर्ष भी एक दर्जन मकान कटान की जद में हैं। नदी और बंधे के बीच बसे इन गांवों में कटान रोकने को प्रशासन के पास कोई चारा नहीं है। गांववालों ने नदी और बंधे के बीच बसे गांवों में कटान रोकने को परियोजना लाने को शासन प्रशासन से मांग की।