देवरिया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को सात वर्ष पूर्व असोम में हुए हिंसा में मारे गए लोगों के अनाथ बच्चों की तलाश है। इसके लिए मानवाधिकार आयोग जिला प्रशासन को बार-बार चिट्ठी लिखकर जानकारी मांग रहा है।
लेकिन प्रशासन के पास उन बच्चों के बारे में कोई सूचना उपलब्ध नहीं है। एसपी ने आयोग को पत्र भेजकर इससे अवगत करा दिया है। वर्ष 2007 में असम के डिब्रूगढ़, धरमाजी और तिनसुकिया में नस्लीय हमले में बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ लोग मारे गए थे। मारे गए लोगों के अनाथ बच्चों को आर्थिक सहायता देने के लिए नेशनल फाउंडेशन फॉर कॉमुनल हारमोनी मुंबई महाराष्ट्र की ओर से आर्थिक सहायता दी जानी है। छपरा जिले के डीएम ने अपने यहां के मारे गए लोगों के अनाथ बच्चों की सूची राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेज दी है। लेकिन देवरिया जिला प्रशासन के पास मारे गए लोगों के बारे में कोई सूचना नहीं है। डीएम देवरिया ने इसके लिए डिब्रूगढ़, धरमाजी और तिनसुकिया के डीएम को पत्र भेजकर मारे गए लोगों का ब्योरा मांगा है। लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया है।
इधर, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के डिप्टी रजिस्ट्रार सुनील अरोरा ने पत्र लिखकर ब्योरा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। इसके जवाब में एसपी रविशंकर छबि ने मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर अवगत कराया है कि इस तरह की कोई सूचना उपलब्ध नहीं है।