सलेमपुर (देवरिया)। लखनऊ के एक अस्पताल में भर्ती सहायक स्टेशन मास्टर विजय कुमार मिश्र (46) की सोमवार की सुबह मौत हो गई। बीते साल 15 दिसंबर की सुबह आपसी विवाद में वरिष्ठ वाणिज्य लिपिक ने उन्हें गोली मारकर घायल कर दिया था। हालत गंभीर होने के कारण उनका ऑपरेशन नहीं किया जा सका। निधन की सूचना मिलते ही परिवार में चीख-पुकार मच गई।
सलेमपुर रेलवे स्टेशन पर तैनात सहायक स्टेशन मास्टर मईल थाना क्षेत्र के बरेजी गांव निवासी विजय कुमार मिश्र पर 15 दिसंबर की सुबह वरिष्ठ वाणिज्य लिपिक उपेंद्र कुमार सिंह ने ताबड़तोड़ चार गोलियां मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना की सुबह एएसएम अपनी ड्यूटी खत्म कर कार्यालय से अपने क्वार्टर जाने की तैयारी में थे। गंभीर रूप से घायल एएसएम तभी से लखनऊ के एक निजी अस्पताल में भर्ती थे। परिवार के लोगों के मुताबिक उनके स्वास्थ्य में सुधार भी हो रहा था। लेकिन सीने में लगी गोली को अभी निकाला नहीं जा सका था। हालत में कुछ सुधार के बाद डॉक्टर ऑपरेशन की तैयारी में थे। शनिवार की रात करीब दो बजे उनकी हालत अचानक बिगड़ने लगी। सोमवार की सुबह करीब नौ बजे उनकी मौत हो गई।
नरमू के इकाई अध्यक्ष थे विजय
विजय नौ माह पहले पूर्वोत्तर रेलवे के मजदूर यूनियन के सलेमपुर इकाई अध्यक्ष चुने गए थे। वह कर्मचारियों की समस्याओं को संगठन के माध्यम से उठाते रहे।
पांच भाइयों में चौथे नंबर के थे विजय
विजय के पिता स्व. उमाशंकर मिश्र आरपीएफ में इंस्पेक्टर थे। उनके पांच बच्चों में विजय चौथे नंबर के थे। सबसे बड़े भाई रविशंकर मिश्र एयरफोर्स में नौकरी करते थे, करीब 20 वर्ष पहले एक ट्रेन हादसे में उनकी मौत हो गई। दूसरे नंबर के भाई रविश चंद्र मिश्र वाराणसी में सहायक जिला बचत अधिकारी हैं। तीसरे नंबर के भाई राकेश मिश्र आजमगढ़ में पीएसी के प्लाटून कमानटेंड पद पर तैनात हैं। चौथे नंबर पर विजय और सबसे छोटे पांचवें नंबर पर विनोद कुमार मिश्र भलुअनी में एबीआरसी हैं। मृतक विजय के चारो बच्चे अभी छोटे हैं और पढ़ाई कर रहे हैं। पत्नी इंदू मिश्रा गांव की पूर्व प्रधान रही हैं और वर्तमान में सलेमपुर में एनके मेमोरियल बालिका महाविद्यालय संचालित कर रही हैं।
मौत की खबर सुनते ही गम में डूबा गांव
बरहज। सलेमपुर में सहायक स्टेशन मास्टर के पद पर तैनात तहसील क्षेत्र के बरेजी गांव निवासी विजय मिश्र 46 वर्ष पुत्र उमाशंकर मिश्र की तेइस दिन बाद इलाज के दौरान लखनऊ के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान सोमवार को मौत हो गई। खबर जैसे ही उनके परिजनों को मिली घर में कोहराम मच गया। दरवाजे पर लोगों की भीड़ जुट गई। रोते-बिलखते परिजनों को देख हर किसी की आंखें नम थीं। मौत की खबर मिलते ही विजय मिश्र की बेटी अर्पिता दहाडे़ मार रो रही थी। बगल में बेटा हर्षित 12 व मोहित 10 की रोने की चीत्कार सुनकर हर किसी की आंखें नम हो गई। रोते बच्चों को पड़ोस की महिलाएं चुप करा रहीं थीं। बगल में आजमगढ़ में दीवान के पद पर छोटे भाई राकेश भाई की मौत की खबर सुनकर गांव आ गए। लोग उन्हें ढांढस बंधा रहे थे। पंद्रह दिसंबर को सलेमपुर रेलवे स्टेशन पर वर्चस्व की लड़ाई में वाणिज्य लिपिक सीवान उपेंद्र सिंह ने विजय को गोली मार दी थी। तेइस दिन बाद इलाज के दौरान लखनऊ में मौत हो गई। लोग दरवाजे पर बैठकर शव के आने का इंतजार कर रहे थे।
गांव के लिए रवाना हुए परिवार के लोग
मौत की खबर सुन उनके परिवार के लोग गांव बरेजी के लिए रवाना हो गए। सोमवार की सुबह आवास पर उनके दोनों पुत्र हर्षित, शोभित और बेटी छोटी अपनी चाची के साथ थे। उनके जाने के बाद एन के मेमोरियल बालिका महाविद्यालय में काम करने वाली महिला गीता आवास की देखरेख में लग गई।
कल ही लखनऊ से घर आया था चचेरा भाई
बरहज। लखनऊ में चल रहे विजय मिश्र की इलाज के दौरान उनका चचेरा भाई आनंद मिश्र को विजय ठीक होने की बात कह घर जाने के लिए कहा था। घर आते ही भाई की मौत की खबर सुन बेसुध हो गये। रो रोकर कह रहे थे कि मंै जानता कि भाई का साथ इतना ही समय तक है तो मैं छोड़कर घर नहीं आता।
जेल में बंद है हत्या का आरोपी उपेंद्र
गोली मारने वाला क्लर्क उपेंद्र कुमार सिंह जिला जेल में बंद है। जीआरपी ने घटना के बाद उसे मौके से हिरासत में ले लिया था। उपेंद्र के पिता भी रेलवे में थे। उनकी मौत के बाद उपेंद्र मृतक आश्रित के रूप में नौकरी कर रहा था। वह सिवान जिले के नौतन थाना क्षेत्र के रामगढ़ गांव का रहने वाला है।
चार गोलियां लगी थीं एएसएम को
विजय कुमार मिश्र के ऊपर चली चार गोलियों में कमर में दो, चेहरे पर एक और एक सीने में बाएं तरफ लगी थी। इसके चलते शुरू से ही उनकी हालत नाजुक थी। उन्हाेंने रेलवे के अधिकारियों और पुलिस को अपना बयान दिया था। जीआरपी एसओ के अनुसार विजय ने घटना में छह अन्य लोगों के शामिल होने की बात कही है।
हत्या का मुकदमा दर्ज होगा
इस मामले की विवेचना कर रहे एसओ जीआरपी भटनी बीएन सिंह ने बताया कि हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज था। विजय की मौत के बाद हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाएगा। मामला अभी विवेचनाधीन है।
नम हो गईं हर किसी की आंखें
सलेमपुर। रेलवे स्टेशन पर तैनात एएसएम विजय कुमार मिश्र की मौत से परिवार ही नहीं उनके सहकर्मी भी शोकाकुल हैं। अपने साथी को खोने का गम उनके चेहरे पर साफ झलक रहा था। साथ बिताए पलों को याद कर उनके सहकर्मी भावुक हो गए। स्टेशन अधीक्षक तारिक महमूद ने बताया कि ‘वह बहुत ही व्यवहार कुशल, मिलनसार स्वभाव के इंसान थे। हर छोटे-बड़े के साथ अच्छे से पेश आते थे। कभी-कभी दूसरे कर्मचारियों से जब यात्रियों की कहासुनी होती थी तो वे समझा बुझाकर शांत कराते थे। जब भी जरूरत हुई, वह हमेशा उपस्थित रहे।’ ट्रेन लेकर भटनी जा रहे गोरखपुर ईस्ट के गार्ड एके दुबे ने बताया कि जब मुझे उनके मौत की सूचना मिली तो काफी दुख हुआ। मैं जब भी सलेमपुर ट्रेन लेकर आया, उनका व्यवहार सहयोग मिला। वह सभी से आत्मीयता रखते थे। ‘उनका कभी किसी से विवाद नहीं हुआ। लोगों को समझने की परख उनमें थी। वह अपने कर्तव्य और दायित्व को बखूबी निभाते रहे।’ यह कहना है रेलपथ के जूनियर इंजीनियर उपेंद्र कुमार का। वाणिज्य अधीक्षक ए होरो ने कहाकि वह एक अच्छे कर्मचारी थे। आपस में सहयोग का भावना रखते थे। हमने एक अच्छे इंसान को खो दिया।