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अनायास ही नहीं फूटा किसानों का गुस्सा

Tue, 08 Jan 2013 05:30 AM IST
Deoria
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देवरिया। सोमवार को किसानों का गुस्सा यूं ही नहीं भड़का। रवि की बुआई समाप्त हो गई, गेहूं के फसल की सिंचाई भी खत्म हो रही है। जनवरी माह का पहला सप्ताह भी बीत गया। तीन माह बीत जाने के बाद भी किसान पसीना बहाकर पैदा किया गया धान नहीं बेंच पाए हैं। अभी भी उनके घरों में धान पड़ा हुआ है।
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सरौरा तिवारी गांव के रहने वाले प्रेमचंद तिवारी दस एकड़ धान बोए थे। करीब 200 क्विंटल धान पैदा हुआ है। जरूरत पड़ने पर कुछ करीब 40 क्विंटल धान 900 रुपये की दर बेंच दिए हैं। शेष धान घर पर ही पड़ा है। अब व्यापारी 800 रुपये प्रति क्विंटल से ज्यादा कीमत नहीं दे रहे हैं। अब हम सड़क पर न उतरे तो क्या करें। सुनील राय छह एकड़ में धान की फसल लगाए थे। विशुनपुर चिरकियहवां के रहने वाले सुनील बताते हैं कि जनपद में कब धान क्रय केंद्र खुलता है और कब बंद हो जाता है, किसान नहीं जान पाते। गांव में करीब 100 ट्राली धान किसानों का बेचने के लिए पड़ा हुआ है। ऐसे में बिचौलियों की चांदी है। मुरलीधर राय गौरीबाजार के खैरबनुआ गांव के निवासी हैं। वैज्ञानिक तरीके से खेती करते हैं। धान की उपज भी ठीकठाक हुई थी। मेरा और गांव के कई लोगों का पूरा का पूरा का धान घर में ही पड़ा हुआ है। किसान क्रेडिट कॉर्ड पर लोन लेकर रबी के फसल की बुआई कराए हैं। गन्ना बेचकर बाकी घर का काम चल रहा है। खैरबनुआ के ही रामदास चौबे तीन एकड़ में धान बोए थे। कई बार क्रय केंद्र का चक्कर लगाए, लेकिन धान नहीं बिका। कोई उपाय जब नहीं सूझा तो 800 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बाजार में बेेंच दिए। उनका कहना है कि किसानों और उनकी फसलों को कोई पूछने वाला नहीं है। ऐसे में हमलोग तो बरबाद हो जाएंगे।
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