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भ्रष्टाचार के खिलाफ छेड़ी हैं जंग

Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
Deoria
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देवरिया। आज ही के दिन यानी 12 अक्टूबर 2005 को देश की संसद ने आरटीआई कानून लागू किया तो लगा कि लोगों को दूसरी आजादी मिल गई। मगर आजादी के इस हथियार को कम लोगों ने अपनाया। लेकिन कुछ ने भ्रष्टाचार और व्यवस्था परिवर्तन के क्षेत्र में इबारत लिख दी। 32 लाख की आबादी वाले इस जिले में उंगलियों पर गिनने वाले आरटीआई कार्यकर्ता उभरे हैं। जिन्होंने न सिर्फ न जिले बल्कि पूरे प्रदेश में अपनी पहचान बनाई है। अब ये लोग अपने मिशन में आगे बढ़ते जा रहे हैं। इन आरटीआई वर्करों ने सरकारी महकमे में हुए बडे़-बडे़ घोटालों से पर्दा उठाया, तो कइयों को उनका अधिकार और हक दिलाने में इनका अहम रोल भी निभाया। अब ये लोग सरकारी महकमे में भ्रष्टाचारियों की नींद हराम कर रहे हैं।
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उजागर मामले : 16 करोड़ का इंदिरा आवास घोटाला, 13 करोड़ का संपूर्ण स्वच्छता अभियान का शौचालय घोटाला, एक करोड़ 26 लाख का नहर सफाई घोटाला, परिवहन विभाग में टैक्स चोरी का घोटाला, समाज कल्याण विभाग में छात्रवृति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति घोटाला। डीआरडीए कार्यालय का घोटाला। इसके अलावा छोटे-छोटे सैकड़ों घोटाले उजागर किए।
उपलब्धि : सांसद निधि का दुरुपयोग रोकने और दोषियों से धन वसूली के लिए केन्द्र सरकार से गाइड लाइन तय कराया। पत्रावली के अभाव में 24 वर्ष से वंचित नलकूप विभाग के दर्जनों कर्मियों को नौकरी दिलाई, रजिस्ट्री विभाग में दैनिक वेतन भोगी लगभग 300 कर्मियों को नौकरी पर स्थायी करवाया।
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उजागर मामले : डीसीएफ में एक दर्जन फर्जी नियुक्ति का मामला उजागर, कोआपरेटिव और वन विभाग में दो दशक से जमे बाबुओं का खुलासा, वन विभाग में आरा मशीन लाइसेंस धांधली का खुलासा, शस्त्र लाइसेंस में गड़बड़ी का खुलासा, पटनवा कांड में किसके आदेश पर चली गोली का खुलासा।
उपलब्धि : फर्जी नियुक्तियां रद हुई। आधा दर्जन मामले लंबित हैं।

उजागर मामले : रामपुर कारखाना में मनरेगा के करोड़ों के गोलमाल का खुलासा, पीसीएफ महुआडीह में धान खरीद का घोटाला, ग्राम पंचायतों में सड़क निर्माण के नाम पर घोटाला, प्राथमिक विद्यालय माधोपुर में लाखों का घोटाला।
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उपलब्धि : घपलेबाज एक ब्लाक स्तर के अधिकारी पर मुकदमा दर्ज कराया। कई मामले लंबित चल रहे हैं।

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