देवरिया। बोध कथाओं का जीवन में बहुत महत्व है। यह बालमन पर सीधे असर करतीं हैं। एक तरफ जहां भरपूर मनोरंजन करती हैं वहीं भविष्य के चुनौतियों से सावधान भी। यह बातें आकाशवाणी के महानिदेशक गुलाब चंद ने कहीं।
वह प्रेस्टिज इंटर कालेज के रजत जयंती समापन कार्यक्रम अवसर पर आयोजित लोक साहित्य में बोध कथाओं की भूमिका पर बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि बोध कथाएं जीवन के सबसे बडे़ सत्य भूख से रूबरू कराती हैं। कहीं ये हमें इस भूख से लड़ते हुए मानवीय मूल्यों को दर्शाती हैं तो कहीं हमें अपने कर्तव्यों का भान भी करातीं है। बोध कथाएं यह इंगित करतीं है कि जैसी सोच होगी वैसा ही भविष्य होगा। इससे मनुष्य के अंदर कर्मठता का संचार भी होता है। इसी क्रम में गोरखपुर विश्व विद्यालय के डा. चितरंजन मिश्र ने कहा कि यह विद्यालय बोध कथाओं का परिसर है। इसका नागरिक निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान है। प्राचीन काल से ही उम्र के साथ सीखने की प्रक्रिया चलती आ रही है। साहित्य शिक्षा अकादमी के सचिव डा. ब्रजेन्द्र त्रिपाठी ने बोध कथाओं का मूल उद्देश्य शिक्षा को बताया। ये बोध कथाएं पीढ़ियों को शिक्षित करती आ रही है। राजा अवधेश प्रताप विश्व विद्यालय रीवा के हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. दिनेश कुशवाहा ने कहा कि जब शिक्षा व्यवसायिकता का रुप ले चुकी है।
इस परिस्थिति में बोध कथा का महत्व बढ़ जाता है। कथाकार सुभाष कुशवाहा ने बोध कथाओं को लोक कथाओं का अग्रज बताया। इस मौके पर बच्चों और एवं अभिभावकों को आगाह करते हुए कहा कि बच्चों की बुनियादी सोच को घालमेल करने वाली बोध कथाओं से बचना चाहिए। सभा को छपरा विश्व विद्यालय के वीरेंद्र यादव ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि ने गांधी एवं शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। इस मौके पर मां सरस्वती का वंदना भी प्रस्तुत किया गया। मुख्य अतिथि को प्रधानाचार्य एसएन सिंह ने अंगवस्त्र भेंट किया। इस मौके पर दीनानाथ कुशवाहा, भोजराज कुशवाहा एडवोकेट, जवाहर यादव भी मौजूद रहे।