देवरिया। गन्ना किसानों को माफियाओं से बचाने के लिए शासन ने नई तरकीब निकाली है। जिले के हर गन्ना किसान का अपना यूनिक नंबर होगा। गन्ना विकास समितियों के माध्यम से सत्यापन कार्य शुरू कर दिया। सत्यापन के बाद मृत किसानों और गांव में नहीं रहने वाले किसानों को डिफाल्टर मानकर अलग कर दिया जाएगा।
गन्ने की खेती करने वाले किसानों की पहचान के लिए शासन ने यूनिक नंबर जारी करने का फैसला किया है। इसकी वजह माफियाओं के चंगुल से किसानों को बचाना है। कई बार किसानों की मजबूरी का फायदा उठाकर माफिया किसानों का गन्ना औने पौने दाम पर लेकर चीनी मिल को बेचकर मुनाफा कमाते हैं। इस पर अंकुश लगाने के लिए किसानों की गन्ने के रकबे की हकीकत राजस्व अभिलेखों से पता किया जाएगा। उसी के हिसाब से किसानों को गन्ने की पर्ची दी जाएगी। जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम ने बताया कि यूनिक कोड 12 अंक का होगा। जिसमें पहले दो अंक जिला का कोड, उसके बाद के दो अंक सोसाइटी, फिर तीन अंक गांव और बाकी अंक किसान का कोड होगा। जिले के गन्ना किसानों का सत्यापन समितियों के माध्यम से कराई जा रही है। मृत या गांव छोड़ चुके किसानों को डिफाल्टर मानकर सूची से अलग किया जाएगा। एक गन्ना कि सान एक ही समिति का सदस्य हो सकता है।