नीलांबुज मिश्र
देवरिया। राजकीय होम्योपैथिक अस्पतालों का बुरा हाल है। इसकी वजह डॉक्टरों की कमी और तैनात कर्मचारियों की मनमानी है। अधिकांश अस्पताल उधार के भवन में संचालित हो रहे हैं। इसकी वजह से मरीजों को होम्योपैथ का इलाज मिलना मुश्किल है। इसको लेकर जिम्मेदार लापरवाह हैं।
जिले में 27 राजकीय होम्योपैथिक अस्पताल हैं। सिर्फ 11 डॉक्टरों की तैनाती है। इसमें तीन डॉक्टरों की ड्यूटी दो अस्पताल और अन्य की तीन-तीन अस्पतालों पर लगाई गई है। ड्यूटी के अनुसार डॉक्टरों को अस्पताल पहुंचना होता है, लेकिन अधिकांश डॉक्टर नहीं जाते। फार्मासिस्टों के भरोसे अस्पताल चलता है। गोड़वली, कुंडौली, अहिल्यापुर, सिरिसिया, रामपुर अवस्थी सहित कई अस्पताल उधार के भवन में संचालित हो रहे हैं। अस्पताल पर मौजूद फार्मासिस्ट और वार्डब्याय समय से अस्पताल तक नहीं खोलते हैं। कागजों में मरीजों का इलाज होता है और अस्पताल भी टाइम से खुलता है। इसकी वजह मॉनीटरिंग करने वाले अफसर खुद लापरवाह हैं। इसके चलते लोगों को घर के नजदीक होम्योपैथ का इलाज नहीं उपलब्ध हो पा रहा है। जिला होम्योपैथिक अधिकारी डॉ. एसके सिंह ने बताया कि डॉक्टरों की कमी से दिक्कत हो रही है। अस्पतालों का संचालन सही तरीके से होता है। शिकायत के अनुसार दोषियों पर कार्रवाई होती है।
इतने डॉक्टरों की है तैनाती
देवरिया। राजकीय होम्योपैथ अस्पताल में डॉ. सत्यप्रकाश शर्मा, डा. अभय कुमार, डॉ. लक्ष्मण प्रसाद, डॉ. रवीश, डॉ. सत्यनरायण प्रसाद, डॉ. अशोक सिंह, डॉ. मनोज गौड़, डॉ. चंद्रशेखर, डॉ. पुनीता राय, डॉ. अशोक गौड़, डॉ. एसके सिंह की तैनाती है।