देवरिया। महिला अस्पताल की व्यवस्था में दलालों की सेंध है। इसमें आशाओं का गिरोह भी सक्रिय है। अफसरों के नाक के नीचे चल रहा दलाली का यह खेल सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़ा कर रहा है। एक माह से अल्ट्रासाउंड कक्ष में ताला लगा है। इसके लिए जहां प्रसूताओं को रकम खर्च करना पड़ रहा है, वहीं प्राइवेट अल्ट्रासाउंड संचालकों और आशाओं की चांदी है। अस्पताल आने वाली प्रसूताओं को दलालों के चंगुल में फंसना पड़ता है।
शहर के भटवलिया की रहने वाली गर्भवती नीलम, पड़री मिश्र की सत्या मिश्रा, सेवरही की पर्मिला देवी, गौरी बाजार की लक्ष्मीना ओपीडी में डॉक्टर से मिलीं। डॉक्टर ने खून जांच और अल्ट्रासाउंड के लिए लिखा। खून जांच के लिए सेंपल अस्पताल में महिलाओं ने दे दिया, लेकिन अल्ट्रासउंड कक्ष में ताला लटका हुआ था। ओपीडी में मौजूद आशा गर्भवती महिलाओं को चहेते अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर ले जाने के लिए कोशिश करने लगीं। एक अल्ट्रासाउंड कराने का फीस 500 बताया। टाल-मटोल करने पर 400 रुपये में बात पक्की हुई। करीब एक माह से महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड नहीं हो रहा है। प्रत्येक दिन 50 से अधिक गर्भवती महिलाएं आती है। अधिकांश गर्भवती महिलाओं को डॉक्टर अल्ट्रासाउंड के लिए लिखते हैं। महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. माला सिन्हा ने बताया कि सलेमपुर के डॉक्टर बृजनंदन की तैनाती यहां अल्ट्रसाउंड के लिए हुई है, लेकिन वह अभी तक नहीं आए। आशा दलाली करती होंगी, लेकिन वह हमारे अंडर में नहीं आती हैं। काम से फुर्सत नहीं है कि आशाओं के फेर में पड़ू। सीएमओ को आशाओं पर पेंच कसना चाहिए।
इनसेट में
डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा अस्पताल
महिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी है। संविदा की डॉक्टर और नर्सों के भरोसे नैया पार लग रहा है। इसके चलते यहां आने वाली गर्भवती महिलाओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
इनसेट में
वार्डों में खुद का लगाया पंखा
महिला वार्डों में लगे पंखे व कूलर खराब हैं। गर्मी से परेशान प्रसूताएं खुद का पंखा लगा रखी हैं। इसकी शिकायत कई बार लोग सीएमएस से कर चुके हैं, लेकिन इससे निजात नहीं मिल रहा है। पानी के लिए भी दिक्कत होती है।