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बच्चें भी नहीं किताब भी नहीं

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देवरिया। शैक्षणिक सत्र शुरू हुए एक सप्ताह गुजर गया है। लेकिन परिषदीय स्कूलों में किताबें और यूनिफॉर्म उपलब्ध नहीं हो सका है। पुराने किताबों से पढ़ाई चल रही है। परिषदीय स्कूलों के जायजा लेने पर शिक्षक तो मुस्तैद दिखें, छात्र-छात्राएं भी पढ़ाई में तल्लीन थीं।, जबकि छात्रों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। शिकायत के बावजूद हैंडपंप ठीक नहीं कराया जा सका। इसके चलते बच्चे दूषित पानी पीने को विवश हैं।
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अमर उजाला टीम ने गुरुवार को परिषदीय स्कूलों का जायजा लिया। सुबह 9.15 बजे रघवापुर स्थित पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पहुंची। यहां पर 32 बच्चे आ चुके थे। कक्षा सात में शिक्षक रत्नेश सिंह इतिहास पढ़ाते मिले। छात्र शैलेश और नंदिनी से जानकारी हासिल की गई तो कॉपी सही मिली। विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुभाष कुशवाहा ने बताया कि पठन-पाठन का जायजा लेते रहते हैं। प्राथमिक स्कूल के कक्षा एक और दो की संयुक्त क्लास चल रही थी। शिक्षक विजय लक्ष्मी मिश्रा वर्णमाला और मात्रा के बारे में पढ़ा रही थीं। सानिया, हसीब, रागिनी, अंजुम, शिवांगी ने बताया कि स्कूल में पढ़ाने के साथ-साथ होमवर्क भी दिया जा रहा है। दूसरे दिन होमवर्क पूरा नहीं करके आने वाले बच्चों से स्कूल में पूरा कराया जा रहा है। प्राथमिक विद्यालय पोखरभिंडा में 87 छात्रों के सापेक्ष 27 छात्र मौजूद मिलें। 10.10 बजे बरामदा मेें टाट फैला कर सुखाया जा रहा था। अंजनि गुप्त कक्षा पांच में ऑयोडीन की कमी से नुकसान को बता रही थीं। शिक्षक प्रियंका कक्षा तीन में गणित पढ़ा रही थीं। विपिन, महेंद्र, प्रतिज्ञा ने गणित का फॉर्मूला बताया। कक्षा चार में छात्र बच्चे मिलें। कक्षा एक और दो में नौ बच्चे मिले। लक्ष्मी, संगत और राज ने जोड़-घटाना बताया। इस बाबत राजीव यादव, बीएसए ने कहा कि बारिश के चलते छात्रों की संख्या कम हो रही है। बच्चों की संख्या बढ़ाने के लिए कोशिश जारी है। हैंडपंप के हालात के बारे मेें जल निगम को अवगत कराया गया है।
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