गर्भवती महिलाओं का होगा यूनिक कोड
बार-बार पंजीकरण कराने से मिलेगा निजात
ऑनलाइन होगा डाटा, बार-बार पंजीकरण कराने से मिलेगा निजात
49 वर्ष तक के महिलाओं की तैयार हो रही सूची
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। अब गर्भवती महिलाओं का ब्यौरा एक क्लिक पर ऑनलाइन दिखेगा। परिवार नियोजन सुविधाओं का लाभ लेने के लिए गर्भवती होने पर हर बार पंजीकरण नहीं कराना पड़ेगा। 49 वर्ष तक की महिलाओं का विवरण आरसीएच (प्रजनन एवं बाल स्वास्थ्य) पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है। डाटा अपलोड होने के बाद गर्भवती को यूनिक कोड दिया जाएगा। देश के किसी भी सरकारी अस्पताल में यूनिक आईडी बताने पर गर्भवती को आसानी से सुविधाएं मुहैया होगी।
अभी तक गर्भवती महिलाओं और बच्चों का पंजीकरण एमसीटीएस (मदर एंड चाइल्ड ट्रेकिंग सिस्टम) पोर्टल पर किया जाता था। पंजीकृत गर्भवती को प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत पहले बच्चे पर पांच हजार रुपये मिलता है। जननी सुरक्षा योजना में संस्थागत प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती महिला को 1400 रुपये दिया जाता है। जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती को सरकारी अस्पताल में लाने, भर्ती कराने व प्रसव के बाद घर पहुंचाने के लिए एमसीटीएस का नंबर होना अनिवार्य है। दूसरी बार प्रसव होने पर दोबारा पंजीकरण की जरूरत पड़ती है। अधिकांश मामलों में ऐसा होता है कि महिला संस्थागत प्रसव के लिए उस अस्पताल में नहीं पहुंच पाती, जहां से उसे एमसीटीएस नंबर मिला है। इससे गर्भवती महिला सरकारी सुविधाओं से वंचित रह जाती हैं।
एमसीटीएस पोर्टल बंद
अब राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत एमसीटीएस पोर्टल को बंद कर इसकी जगह आरसीएच पोर्टल शुरू किया गया है। इसमें पहले आशा कार्यकर्ताओं को 49 वर्ष तक के उम्र की महिलाओं को चिह्नित किया जा रहा है, जिन्हें परिवार नियोजन संबंधी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी है। आशा कार्यकर्ता उन महिलाओं को भी चिह्नित करेंगी, जिनकी हाल ही में शादी हुई है, ताकि गर्भवती होने पर टीकाकरण से लेकर प्रसव तक की सूचनाएं व सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सके।
आशा कार्यकर्ता 49 वर्ष तक की महिलाओं को चिह्नित कर रही है। कुछ सीएचसी पर इसकी सूची पहुंच गई है और डाटा फीडिंग का कार्य चल रहा है।
डॉ. धीरेंद्र कुमार, सीएमओ