देवरिया। देवरिया की पहचान अब प्लास्टिक के प्रयोग से बने सजावटी सामान नहीं, बल्कि छोटे-छोटे उद्यमियों की ओर से निर्मित रेडिमेड गारमेंट्स बनेंगे। ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडेक्ट’ के तहत हस्तशिल्प के रूप में अब रेडिमेड गारमेंट्स (सिलाई-कढ़ाई-बुनाई) को ही देवरिया का उत्पाद बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। उद्योग विभाग ने इसका पूरा खाका तैयार कर लिया है। उच्चाधिकारियों की सहमति भी मिल चुकी है। दस अगस्त को लखनऊ में होने वाले समिट में इस पर अंतिम मुहर लग जाएगी। प्रधानमंत्री की मौजूदगी में होने वाले इस समिट में रेडिमेड गारमेंट्स से जुड़े स्टॉल भी लगाए जाएंगे।
हर जिले के एक उत्पाद को देश-प्रदेश स्तर पर पहचान देने के लिए शुरू प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडेक्ट’ में पहले देवरिया से सजावटी सामान को शामिल किया गया था। इसमें तोरणद्वार, झालर आदि शामिल थे। इनके निर्माण में प्लास्टिक की चीजों का अधिक इस्तेमाल है। प्रदेश में प्लास्टिक पर रोक लगने के बाद इन वस्तुओं की मांग और बिक्री प्रभावित हुई है। लिहाजा इसे पहचान दिलाने की मुहिम भी ठप पड़ गई है। नए निर्देश के बाद अब हस्तशिल्प से रुप में सिलाई-कढ़ाई-बुनाई को बढ़ावा देने के लिए रेडिमेड गारमेंट्स को उत्पाद के रूप में शामिल करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। डीएम की संस्तुति के बाद इसका पूरा विवरण तैयार कर शासन को भेज दिया गया है। इस पर उच्चाधिकारियों की सहमति भी मिल चुकी है। अब 10 अगस्त को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में होने वाले ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडेक्ट’ समिट में इस पर मुहर लग जाएगी। उद्योग विभाग का दावा है कि इस प्रोडेक्ट के चुने जाने से न सिर्फ जिले में बड़े स्तर पर रोजगार सृजन होगा, बल्कि महिलाएं-युवतियां भी इससे अच्छी संख्या में जुड़ सकेंगी।
छोटे-छोटे क्लस्टर बनेंगे, दिलाएंगे लोन
रेडिमेड गारमेंट्स का कारोबार अभी सीमित रुप में है। छोटे स्तर पर ही लोग इससे जुड़े हैं। संसाधनों के अभाव में हुनरमंद होने के बावजूद वह इसे विस्तार नहीं दे पा रहे। वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडेक्ट के तहत न सिर्फ पहचान दिलाई जाएगी, बल्कि इसे विस्तार देने की पूरी योजना है। इसके तहत कढ़ाई-सिलाई-बुनाई में रुचि लेने वालों को रोजगार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के जरिए बिना किसी भाग-दौड़ के पांच से 25 लाख रुपये तक की वित्तीय मदद उपलब्ध कराई जाएगी। छोटे-छोटे क्लस्टर बनाकर उद्योग स्थापित किया जाएगा। यही नहीं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर जैम (जीईएम) पोर्टल के जरिए तैयार माल की बिक्री की भी व्यवस्था होगी।
लखनऊ में लगेंगे सात स्टॉल
‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडेक्ट’ की लॉचिंग 10 अगस्त को लखनऊ से होगी। प्रदेश के सभी जिलों से चयनित उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसमें जिले से स्टॉल लगाने के लिए सात लोगों का चयन किया गया है। इन स्टॉलों पर रेडिमेड गारमेंट्स को प्रस्तुत किया जाएगा। इसके अलावा 35 अन्य लोग भी समिट का हिस्सा। यह वह लाभार्थी हैं, जिन्हें रोजगार योजनाओं के तहत लाभान्वित किया गया है।
रेडिमेड गारमेंट्स के लिए यहां पर्याप्त मानव श्रम व संसाधन हैं। लोगों में हुनर भी है। योजना के तहत उन्हें प्रोत्साहित कर इससे जोड़ा जाएगा। उन्हें हरसंभव मदद दी जाएगी, जिससे वह अपने व्यवसाय को बढ़ाकर उत्पाद को बाहर तक भेज सकें।
- प्रभात यादव, उपायुक्त, उद्योग।
सजावटी सामान की जगह रेडिमेड गारमेंट्स को ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडेक्ट’ के तहत जिले का उत्पाद बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसमें पर्याप्त संभावनाएं भी हैं। योजनाबद्ध ढंग से इस पर काम करने का निर्देश दिया गया है। -सुजीत कुमार, डीएम।