देवरिया। पर्यावरण बचाने की मुहिम के बीच जिले में हरियाली तेजी से गायब हो रही है। पिछले एक वर्ष सिर्फ फोरलेन के निर्माण के नाम पर साढ़े 28 हजार पेड़ों को काट दिया गया। नियमानुसार सड़क निर्माण के दौरान काटे जाने वाले पेड़ों के बदले दोगुनी भूमि में अन्यत्र पौधरोपण होना चाहिए, मगर यहां इसकी कोई योजना नहीं है। जमीन का अभाव बताकर पेड़ लगाने से इनकार कर दिया गया है। देवरिया में काटे गए पेड़ों के बदले अब ओबरा (सोनभद्र) में पौधरोपण की तैयारी की जा रही है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 20 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में से 14 शहर भारत के हैं। इन शहरों में दिल्ली के अलावा वाराणसी भी शामिल है। देवरिया की जलवायु भी बहुत शुद्ध नहीं है। हरे पेड़ों लगातार काटे जाने के कारण समस्या बढ़ती जा रही है। पिछले कुछ वर्षों में शहर का तेजी से विस्तार हुआ है। इसके लिए पेड़-पौधों की ही बलि चढ़ी है। पुराने शहर और नई आवासीय कॉलोनियों के बीच हरियाली गायब होने से बढ़ते प्रदूषण के बीच लोगों का दम घुट रहा है।
नजीर के तौर पर शहर के मध्य बन रहे फोरलेन की ही बात करें तो इस सड़क के निर्माण के बदले किनारों पर स्थित हरे पेड़ों को काट दिया गया। वन विभाग के मुताबिक छोटे-बड़े करीब 28 हजार पेड़ फोरलेन बनाने के लिए काटे गए हैं। इन पेड़ों के बदले जिले में कहीं भी पौधरोपण की कोई योजना नहीं है। अफसरों की दलील है कि इतनी संख्या में पौधरोपण के लिए जिले में कोई जमीन उपलब्ध नहीं है। लिहाजा यह पौधे सोनभद्र के ओबरा में लगाए जाएंगे। सवाल यह है कि पेड़ कटने से देवरिया का पर्यावरण प्रभावित हुआ है तो फिर 300 किमी दूर सोनभद्र में पौधरोपण से यहां के लोगों को क्या लाभ मिलेगा।
डीएफओ पीके गुप्ता का कहना है कि वन विभाग के पास जिले में जमीन की कमी है। इसके चलते सड़क निर्माण के दौरान काटे गए पेड़ों की भरपाई नहीं हो सकती। जिले में जमीन नहीं होने पर प्रदेश के किसी भी हिस्से में दोगुनी भूमि में पौधरोपण करने का नियम है। इस नियम के तहत देवरिया में हुई पेड़ों की क्षति को सोनभद्र में पूरा किया जा रहा है। ओबरा में सवा लाख पौधे लगाए जाएंगे।
तीन साल में लगे पांच लाख पौधे, अधिकांश गायब
वन विभाग का दावा है कि पर्यावरण संरक्षण के लिए पिछले तीन साल में विशेष अभियान चलाकर पांच लाख पौधे लगाए गए हैं। जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगाए गए इन पौधों में अब तक कितने सलामत हैं, विभाग के पास इसका कोई ब्योरा नहीं है। डीएफओ के मुताबिक दो साल तक वन विभाग पौधों का अनुरक्षण करता है। तब 90 प्रतिशत पौधे सही सलामत थे। ताजा स्थिति की कोई जानकारी उनके पास उपलब्ध नहीं है। सर्वे कराया जाएगा। वैसे इस बार 2.89 लाख पौधे रोपे जाएंगे।