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बीएसए कार्यालय पर शिक्षामित्रों ने दिया धरना

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देवरिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से नाराज शिक्षाम ित्रों ने शुक्रवार को बीएसए कार्यालय पर धरना दिया। एहतियातन भारी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात की गई थी, लेकिन शिक्षामित्रों ने उग्र रूप नहीं अख्तियार किया। उधर, स्थानीय खुफिया विभाग की रिपोर्ट कहती है कि यदि शक्षिामित्रों के मामले में सरकार एक सप्ताह के भीतर कोई फैसला नहीं लेती है तो उनका आंदोलन उग्र हो सकता है। इससे कानून-व्यवस्था भी बिगड़ने का अंदेशा है।
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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षामित्र से सहायक अध्यापक बने लोगों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है। वे इस मजधार में फंसे हैं कि काम करने के बाद वेतन मिलेगा या नहीं। यदि वेतन मिलेगा तो शिक्षामित्र का या सहायक अध्यापक का। बीएसए कार्यालय ने भी शिक्षामित्रों के मामले में चुप्पी साध ली है। बीएसए उपेंद्र कुमार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पालन किया जाएगा। शासन से इस मामले में कोई गाइडलाइन नहीं आया है। बीएसए कार्यालय पर सैकड़ों की संख्या में शिक्षामित्र मौजूद थे। सरकार विरोधी नारों से माहौल गुंजायमान था तो शिक्षामित्रों के चेहरे पर दर्द पभी झलक रहा था। कल तक परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को शिक्षा देने की जिम्मेदारी उठाने वाले शिक्षामित्र अब नौकरी की मांग कर रहे हैं। वक्ताओं ने कहा कि यह लड़ाई आरपार की है। हक लेकर ही दम लिया जाएगा। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष शैलेंद्र कुुमार सिंह ने कहा कि आंदोलन में सहयोग किया जाएगा। 31 जुुलाई तक यदि सरकार फैसला नहीं लेती है तो जनपद के सभी परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य ठप कर दिया जाएगा। रामयोगेंद्र भारती ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शिक्षामित्र आहत हैं।
इनसेट में-
परिषदीय विद्यालयों में बहुत कम आए बच्चे
देवरिया। नाग पंचमी के दिन परिषदीय विद्यालयों के खुले रहने से विद्यालयों में बच्चों की उपस्थिति बेहद कम रही। जिले में 1876 परिषदीय प्राथमिक विद्यालय हैं। जबकि सात सौ अधिक जूनियर विद्यालय हैं। जिले के 3067 शिक्षामित्रों में से 2677 सहायक अध्यापक पद पर समायोजित हो गए थे। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2677 शिक्षकों की एकाएक कमी होने के बाद परिषदीय विद्यालयों में पठन-पाठन प्रभावित होने लगा है। सरकार की ओर से नाग पंचमी की छुट्टी रद किए जाने के बाद शुक्रवार को जब विद्यालय खुले तो बच्चे के न के बराबर पहुंचे। ऐसे में जिले के कई विद्यालय सूने भी पड़े रहे। बिना बच्चों के शिक्षकों को समय काटना मुश्किल हो गया था।
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