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कृषि मंत्री के जिले में किसान परेशान, आढ़ती खरीद रहे धान

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बिचौलियों को धान बेचने को मजबूर किसान
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कृषि मंत्री के जिले में किसान परेशान, आढ़ती खरीद रहे धान
80 क्रय केंद्र हो रहे संचालित, एक पर हुई कार्रवाई
48 दिन में सिर्फ 25 फीसदी हो सकी धान की खरीद
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। कृषि मंत्री के जिले में धान खरीद जोर नहीं पकड़ पा रहा है। इसकी वजह क्रय केंद्र प्रभारियों की मनमानी और अफसरों की उदासीनता है। मजबूर किसान औने-पौने दाम पर आढ़तियों को धान बेच रहे हैं। यहीं वजह है कि जिले में अभी तक लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ 25 फीसदी धान की खरीद हो सकी है।
किसानों की आय दोगुना करने पर प्रदेश सरकार का फोकस है। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी इस पर भारी पड़ रही है। किसानों को क्रय केंद्रों पर धान बेचने के लिए नाको चने चबाने पड़ रहे हैं। जिले में 81 क्रय केंद्र धान खरीद के लिए खोला गया है। धान खरीद पर अफसरों का जोर भी है। लेकिन बेलगाम हुए सिस्टम से किसान उबर नहीं पा रहे हैं। क्रय केंद्रों पर धान लेकर पहुंच रहे किसानों को टरकाया जा रहा है। तंग आकर किसान आढ़तियों को अपना धान कम कीमत पर बेच रहे हैं। विभागीय मिलीभगत से आढ़ती क्रय केंद्रों सरकारी रेट से धान आसानी से बेच रहे हैं। नवंबर में धान की खरीद नाम मात्र का हुआ था। वीडियो कांफ्रेसिंग में सचिव ने इसको लेकर जवाब-तलब भी जिले के अधिकारियों से की थी। बावजूद इसके अफसरों की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। डिप्टी आरएमओ जितेंद्र यादव ने कहा कि क्रय केंद्रों पर धान की खरीद हो रही है। लापरवाही बरतने वाले क्रय केंद्र प्रभारियों पर कार्रवाई की जा रही है। साधन सहकारी समिति पैकौली के प्रभारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की गई है। धान खरीद नहीं होने से जुड़ी शिकायतों का निस्तारण किया जा रहा है।
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2823 किसानों से खरीदा जा चुका है धान
अभी तक सभी क्रय केंद्रों पर 2823 किसानों से पौने दो लाख क्विंटल धान की खरीद की गई है जबकि लक्ष्य 6.76 लाख क्विंटल का मिला है। 28 फरवरी तक लक्ष्य पूरा करना संभव नहीं है। विभागीय अफसर तय समय तक 50 फीसदी धान की खरीद होने का अनुमान लगा रहे हैं।

तीन फीसदी हाई ब्रीड धान पर घटी रिकवरी
क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए किसानों को पहले ऑनलाइन पंजीकरण कराना पड़ रहा है। उसके बाद धान की रिकवरी चेक कर खरीद की जा रही है। बेहतर धान होने पर 1750 रुपये प्रति क्विंटल के दर से भुगतान किया जा रहा है। इसके अलावा 20 रुपये पल्लेदारी व ढुलाई दिया जा रहा है। धान की रिकवरी का मानक 67 फीसदी तक होना तय किया गया था। इसके चलते अनेक किसानों का धान मानक पर खरा नहीं उतरता था। सरकार ने पांच दिन पूर्व हाईब्रिड धान की रिकवरी तीन फीसदी घटा दी है, अब 64 फीसदी रिकवरी होने पर धान बेचा जा सकता है।

गौर कोठी क्रय केंद्र पर 20 दिन पूर्व धान लेकर बचने के लिए गए थे। धान में नमी होने का हवाला देते हुए क्रय केंद्र प्रभारी नहीं लिया। रबी की बुआई के लिए रुपये की जरूरत थी। इस लिए दरवाजे से आढ़ती को धान बेचना पड़ा।
-अवधेश गोड़

राउतपार क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए किसान चक्कर काट रहे हैं। धान खरीदने के बजाए क्रय केंद्र प्रभारी टालमटोल कर रहे हैं। इसके चलते किसान मजबूरी में 1400 रुपये क्विंटल आढ़ती को धान बेचने को विवश हैं।
-संजय पांडेय

किसानों के सहूलियत को सरकार अनेक योजनाएं चला रही है। लेकिन अफसरों के उदासीनता के कारण किसानों को उसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। धान खरीद की व्यवस्था काफी लचर है। किसान धान बेचने के लिए परेशान हैं।
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-रामनाथ त्रिपाठी

किसानों को क्रय केंद्र प्रभारी परेशान कर रहे हैं। धान खरीद करने के बजाए नियमों का हवाला देकर टरका रहे हैं। शिकायत के बावजूद अफसर कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। मजबूरी में आढ़तियों को धान बेचना पड़ रहा है।
-रविंद्र
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